Ambikapur News: नगरीय निकाय चुनाव: कांग्रेस को अंबिकापुर निगम से उम्मींद,तिर्की जीते तो रचेंगे इतिहास और बनाएंगे कीर्तिमान

Ambikapur News: सरगुजा। छत्तीसगढ़ के 10 नगर निगम के महापौर और पार्षद पद के उम्मीदवारों ने चुनावी कैंपेनिंग में खूब पसीना बहाया। अपने-अपने तरीके से लाबिंग भी की। पार्टी के प्रचारकों ने चुनावी सभाएं ली और मतदान के पहले जो कुछ सियासत में चलता है सब-कुछ उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों ने किया। कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी मेहनत, मतदाताओं को रिझाने और लुभाने के अपने तरीके और किए गए चुनावी वायदों का असर कितना रहा यह तो वोटों की गिनती के बाद पता चलेगा। बहरहाल चुनाव परिणाम से पहले अब चौक-चौराहों में किस दल की शहर सरकार बन रही है और कौन चुनाव जीत रहे हैं इसकी चर्चा होने लगी है। इन्हीं चर्चा और सियासी संभावनाओं के बीच कांग्रेस छत्तीसगढ़ की 10 में से दो सीट पर कुछ ज्यादा ही भरोसा कर रहे हैं। ये दोनों सीटें उत्तर छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखती हैं।
उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए कुछ खास लेकर आने वाली है। अंबिकापुर ओर चिरमिरी नगर निगम में कांग्रेस की संभावनाएं बलवती होने लगी है। अंबिकापुर नगर निगम चुनाव की चर्चा इसलिए कि कांग्रेस ने यहां चिरपरिचित चेहरा को उम्मीदवार बनाया है। दो बार के मेयर डा अजय तिर्की चुनाव मैदान में हैं। डा तिर्की की चर्चा उनकी सेवाभाव और मिलनसार छवि के कारण प्रदेशभर में होती है। राजनीति से लेकर उनके काम करने के अलग तरीके और कायदे भी है। व्यक्तिगत छवि के साथ ही पूर्व डिप्टीस सीएम टीएस सिंहदेव के करीबी होने का राजनीतिक लाभ उनको मिलेगा,इसकी चर्चा भी होने लगी है और संभावनाएं भी लोग देख रहे हैं। चुनाव को लेकर परिणाम से पहले राजनीतिक भविष्यवाणी या फिर अटकलें लगाना कुछ ठीक नहीं रहता पर जैसा कि संभावनाएं कांग्रेस देख रही है अगर वह सच साबित होता है तो मेयर के रूप में डा तिर्की की यह तीसरी जीत होगी। जीत का हैट्रिक लगाने वाले छत्तीसगढ़ के साथ ही देश के पहले व्यक्ति होंगे जो जीत का कीर्तमान रचने के साथ ही राजनीति में मेयर के पद पर जीत की हैट्रिक लगाएंगे। एक ऐसा कीर्तिमान बनाएंगे जो अब तक किसी ने नहीं बनाई।
भाजपा की उम्मीदवारी को लेकर यह भी चर्चा
प्रदेश भाजपा ने जिला उपाध्यक्ष मंजूषा भगत को चुनाव मैदान में उतारा था। टिकट वितरण के पहले स्थानीय और प्रदेश स्तर पर जिस तरह सियासी रस्साकशी और मतभेद उभरकर सामने आया उसका दुष्परिणाम की आशंका अभी से ही होने लगी है। उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के अलग-अलग गुटों में अलग-अलग राय और अपनी पसंद थी। विवाद इतना बढ़ गया कि मंजूषा को ही फाइनल करना पड़ा। उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही जिस तरह एंटी पब्लिसटी हुई वह भी भाजपा प्रत्याशी के लिए पूरे चुनाव के दौरान माइनस ही रहा। एक गुट ने डमी केंडिडेट के रूप में जमकर प्रचार कर दिया। माउथ पब्लिसटी आखिरी दिन तक ऐसा प्रभावी रहा कि डमी केंडिडेट की छवि से निकल ही नहीं पाई।
इन वार्डाें के मतदान को लेकर चर्चा
48 वार्ड वाले अंबिकापुर नगर निगम में 14 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा अपने आपको कहीं नहीं पाता। सात वार्ड में क्रिश्चियन और सात वार्ड में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। 14 वार्ड के मतदाताओं ने शत-प्रतिशत मतदान किया है। ये ऐसे वार्ड हैं जहां कांग्रेस हमेशा से ही जीत दर्ज करती आई है। हालांकि क्रिश्चियन बहुलता वाले वार्ड से मंजूषा पार्षद चुनाव जीतते रही हैं। भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से अशुभ संकेत ये कि बीते निगम चुनाव की अपेक्षा इस बार मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा है।चार प्रतिशत घट गया है।
चिरमिरी निगम चुनाव में मंत्री की प्रतिष्ठा लगी दांव पर
चिरमिरी नगर निगम चुनाव का परिणाम चाहे जो आए छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की राजनीतिक प्रतिष्ठा सीधेतौर पर जुड़ गई है। यहां से कांग्रेस ने पूर्व विधायक डा विनय जायसवाल को मेयर केंडिडेट बनाया है। कोरबा लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडेय की करारी हार के पीछे उत्तर छत्तीसगढ़ में भाजपा की कमजोर रणनीति और खराब प्रदर्शन को ही कारण माना जा रहा है। मौजूदा चुनाव में एक बार फिर मंत्री की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है।






