Bilaspur High Court: चीफ जस्टिस ने ऐसा क्यों कहा- कोई समाज कितना सभ्य है इसका पैमाना तो…..

Bilaspur High Court: चीफ जस्टिस ने ऐसा क्यों कहा- कोई समाज कितना सभ्य है इसका पैमाना तो…..

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि गरिमापूर्ण जीवन हर बच्चे का मूलभूत अधिकार है। चाहे वह दिव्यांग ही क्यों ना हो। ऐसे बच्चों का मूलभूत अधिकार अक्षुण्ण रहे और उन अधिकारों को सहजताके साथ उपलब्ध कराना हम सब की जिम्मेदारी है। कोई समाज कितना सम्पन्न व सभ्य है, इसका पैमाना यह है कि वह समाज अपने सबसे कमजोर वर्ग के साथ किस तरीके से व्यवहार करता है।

शनिवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट परिसर में दिव्यांग बच्चों के संरक्षण को सशक्त व प्रभावी बनाने के लिए “हितधारकों का नौवां राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम”आयोजित किया गया। राज्य स्तरीय कंसल्टेशन प्रोग्राम में उपस्थित जजों,ला अफसरों व अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस सिन्हा ने कहा कि देश में दिव्यांगता से ग्रस्त लोगों में से अधिकांश संख्या बच्चों की है। जिन्हें उचित शिक्षा व पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल पाता। दुख की बात ये कि समाज के मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर भी नहीं मिल पाता। दिव्यांगता से ग्रसित बच्चों के लिए विशेष स्कूल और विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है। ऐसे बच्चों को विशिष्ट चिकित्सकीय देख-रेख की आवश्यकता होती है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि प्रारंभिक अवस्था में ऐसे बच्चों को चिकित्सकीय सहायता मिल जाए तो ऐसे बच्चों की जटिलताएं कम हो सकती है। उन्होंने इसबात पर बल दिया कि दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चों के लिए एक गरिमापूर्ण जीवन एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना होगा। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के साथ ही उनके परिवारजनों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके साथ समानता का व्यवहार होना चाहिए, जिससे दिव्यांग बच्चे समाज के मुख्य धारा में रहें ना कि समाज के हाशिए पर। बच्चों की देखरेख करने वाली संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे कई बार यह नहीं जान पाते कि उनके साथ कोई अपराध हुआ है। कई बार यदि वे जानते भी हैं तो अपनी शारीरिक व मानसिक दुर्बलता के कारण बता पाने में अक्षम होते हैं। ऐसी दशा में हम सबका दायित्व है कि बच्चों की देखरेख करने वाली संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षा को अक्षुण्ण रखें। स्वागत व आरंभिक भाषण  ने कार्यशाला को संबोधित किया। आभार प्रदर्शन जस्टिस संजय के अग्रवाल ने किया।

चीफ जस्टिस ने इन विषयों पर खींचा ध्यान

0 विधि से संघर्षरत् बालकों के साथ-साथ अपराध के पीड़ित बच्चों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए तथा लैंगिक अपराध से पीड़ित बच्चों को यथाशीघ्र प्रतिकर उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ-ही-साथ ऐसे बच्चों की चिकित्सा परिचर्या व शिक्षा व पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

0 दिव्यांगता से ग्रस्त पीड़ित बच्चों का साक्ष्य न्यायालय में सतर्कता और सावधानी से कराया जाना चाहिए। विशेष रूप से मानसिक रूप से कमजोर तथा मूक व बधिर पीड़ितों का साक्ष्य कराए जाते समय व साक्ष्य विश्लेषण करते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और साक्ष्य अभिलिखित किए जाने में यथासंभव विधि अनुसार विशेषज्ञों की सहायता ली जानी चाहिए।

0 दुष्कर्म के कारण गर्भवती हो जाने वाली महिलाओं के गर्भ समापन में आने वाली कठिनाईयों का जिक करते हुए सभी हितधारकों यथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों, पुलिस, न्यायालय चिकित्सक व अधिवक्ताओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

फ्लिप चार्ट का किया प्रदर्शन

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व अन्य जजों ने दुष्कर्म पीड़िता के गर्भ समापन के संबंध में विभिन्न हितधारकों की भूमिका को प्रदर्शित करते हुए एक फ्लिप चार्ट जारी किया। फ्लिप चार्ट में दुष्कर्म पीड़िता के गर्भ समापन के संबंध में पुलिस, न्यायालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व चिकित्सकों की भूमिका को स्पष्ट रूप से बताया गया है, जो पीड़िता के गर्भ समापन के संबंध में अत्यंत महत्वपूर्ण है ।

कलाकार बच्चों को सीजे ने किया पुरस्कृत

दिव्यांग बच्चों के द्वारा बनाए गए चित्रित कैनवास, जूट के बैग, विभिन्न हस्तशिल्प हाई कोर्ट की गैलरी में प्रदर्शित किए गए। यह प्रदर्शनी इन युवा दिव्यांग कलाकारों की प्रतिभाओं के लिए प्रमोशन, प्रेरणा और उत्साह का संचार करने वाला साबित हुआ। चीफ जस्टिस सिन्हा ने पेंटिंग बनाने वाले दिव्यांग बच्चों के साथ मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

इन विभागों के अफसरों की रही मौजूदगी

छत्तीसगढ राज्य न्यायिक अकादमी बिलासपुर, छत्तीसगढ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास स्कूल शिक्षा विभाग, सचिव समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस मुख्यालय रायपुर, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, यूनिसेफ के प्रतिनिधि,अधिकारियों की उपस्थिति रही।

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