नगरीय निकाय चुनाव: कांग्रेसी रणनीति की खुली पोल, ये तो कमाल हो गया…बिलासपुर से लेकर बस्तर तक मचा सियासी बवाल

नगरीय निकाय चुनाव: कांग्रेसी रणनीति की खुली पोल, ये तो कमाल हो गया…बिलासपुर से लेकर बस्तर तक मचा सियासी बवाल

बिलासपुर। निकाय चुनाव में एक नहीं पांच मंतूराम का कमबैक हुआ है। कांग्रेस के पांच वार्ड पार्षद के उम्मीदवारों ने पार्टी और संगठन के साथ ऐसा खेला किया है कि जिससे संगठन के पदाधिकारियों का सियासी करियर भी दांव पर लग गया है। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है कि पीसीसी मंतू राम पर तो कार्रवाई करेगी, संगठन के पदाधिकारी भी घेरे में आएंगे। जिसकी बेपरवाही के चलते प्रदेशभर में पार्टी की किरकिरी हो रही है।

बिलासपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 13 में जो कुछ हुआ उसे महज संयोग मानकर ना तो टाला जा सकता है और ना ही इसे भुलाया जा सकता है। कांग्रेस की बात करें तो पार्षद से लेकर मेयर और नगरपालिका व नगर पंचायत के अध्यक्ष से लेकर वार्ड पार्षद के लिए दावेदारों से आवेदन मंगाए गए थे। टिकट के लिए तय मापदंड में कांग्रेस के प्रति ईमानदार और कर्मठ कार्यकर्ता। इस मापदंड पर तो वे सभी पांचों पार्षद पद के उम्मीदवार खरे नहीं उतर पाए, जिस बिना पर जिला व शहर कांग्रेस कमेटी ने उम्मीदवार बनाया था। नामांकन पत्रों कें जानबुझकर गड़बड़ी करने और पर्चा दाखिल ना करने के पीछे कारण चाहे जो भी रहा हो, संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, दंतेवाड़ा और कटघोरा के पांच वार्डों में जो कुछ हुआ वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। जाहिरतौर पर यह भी कहा जा रहा है कि दावेदारी तय होने के बाद ये सत्ताधारी दल के रणनीतिकारों और प्रमुखों के संपर्क में आए और खेला किया।

कोरबा नगर निगम के वार्ड नंबर-18 में भी बिलासपुर की तर्ज पर सियासत दोहराई गई। नतीजा भाजपा के नरेंद्र देवांगन का पार्षद बनना तय हो गया है। दुर्ग नगर निगम के वार्ड-21 की कांग्रेसी उम्मीदवार ने भाजपा की विद्यावती के लिए पार्षद की कुर्सी आसान कर दिया।

कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में तो गजब हो गया। वार्ड क्रमांक 13 की कांग्रेस उम्मीदवार ने पर्चा ही जमा नहीं किया। संगठन के पदाधिकारियों को पूरे समय अंधेरे में रख दिया और भाजपा के लिए राह आसान कर दिया। दंतेवाड़ा में भी कमोबेश कुछ इसी तरह की सियासत चली। यहां तो आपसी सहमति का ऐसा खेल हुआ जिससे कांग्रेस की किरकिरी ही हो गई।

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