NPG खबर का असर: डीपीआई ने पांच DE0,एक सहायक संचालक व एक कर्मचारी को जारी किया नोटिस

NPG खबर का असर: डीपीआई ने पांच DE0,एक सहायक संचालक व एक कर्मचारी को जारी किया नोटिस

बिलासपुर। एनपीजी में फर्जीवाड़े की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग के आला अफसरों में हड़कंप मच गया था। विलंब से ही सही डीपीआई ने जिम्मेदार आधा दर्जन अफसरों व एक कर्मचारी को शोकाज नोटिस जारी कर पूछा है कि लाखों रूपये की सरकारी कीताबें बच्चों को वितरित करने के बजाय कबाड़ में कैसे पहुंच गया। जिम्मेदारी अफसरों व कर्मचारी को जवाब पेश करने के लिए सात दिनों की माेहलत दी है। डीपीआई ने चेतावनी दी है कि तय समय पर जवाब ना देने की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

डीपीआई ने तत्कालीन डीईओ व एक कर्मचारी को भेजे शोकाज नोटिस में लिखा है कि प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के अनुसार डीईओ जैसे जिम्मेदार पद पर कार्यरत होने के बाद भी आपके द्वारा पुस्तकों का मिलान ना कर सहायक वर्ग तीन रामटेके के कथन के अनुसार गोदाम से कीताबें ना बेचे जाने की रिपोर्ट पेश कर दी। जबिक गोदाम में कीताबें थी ही नहीं। आपके द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पूरी तरह से गैर जिम्मेदार व लापरवाही भरा है। यह सुनियोजित लापरवाही व मिलीभगत की ओर इशारा करता है। आपके द्वारा लापरवाही बरतने के कारण उक्त घटना घटी। जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। सहायक वर्ग तीन रामटेके को जारी शोकाज नोटिस में डीपीआई ने लिखा है कि आप सितम्बर 2023 से पाठ्यपुस्तक वितरण के प्रभारी थे। स्टेट स्कूल के कमरे की चाबियों आपके पास थी और आपके द्वारा कमरे खोलकर भृत्यों के भरोसे छोड़कर चले जाना पुस्तक बेचने में मिलीभगत एवं कार्य में लापरवाही को इंगित करता है ।

आपके द्वारा लापरवाही बरतने के कारण उक्त घटना घटित हुई है, जिससे विभाग की छबि घूमिल हुई। उक्त कृत्य छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम- 03 के विपरीत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है । अतः उक्त सम्बंध में, क्यों न आपके विरूद्व छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाये। इस सम्बंध में आप अपना लिखित प्रतिवाद, इस पत्र की प्राप्ति के 07 दिवस के भीतर संचालक, लोक शिक्षण को प्रस्तुत करें। आपको यह भी सूचित किया जाता है कि यदि आपका लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होता है, तो यह समझा जावेगा कि इस सम्बंध में आपको कुछ नहीं कहना है और आपके विरूद्व नियमानुसार एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी, जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे ।

0 क्या है मामला

पाठय पुस्तक निगम से बच्चों को बांटने के लिए भेजी गई तकरीबन 30 टन किताबों को रद्दी में बेच दिया था। एनपीजी में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद जांच बैठाई गई थी। तब शिक्षा विभाग के अफसर इसे डिपो का मसला बता रहे थे। डिपो प्रभारी ने भी मामले में अनभिज्ञता जताते हुए दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी पर सारा दोष मढ़ दिया था। जांच के दौरान कबाड़ियों ने राजनांदगांव डिपो से भी किताबें खरीदने की बात स्वीकारी थी। इसके बाद जांच के लिए गठित टीम ने पुस्तक घोटाले के मामले में राजनादगांव जिले के अफसरों से भी पूछताछ की । पूछताछ में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ने 16 टन किताब बेचने की बात स्वीकारी थी। इसके बाद डिपो प्रभारी सहित सभी अधिकारी-कर्मचारी जांच के घेरे में आए।

शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए डिपो से 33 लाख 96 हजार 365 किताबें बच्चों को बांटने के लिए भेजी गई थी। विभाग के अफसर 33 लाख 22 हजार 388 किताबों को बांटने का दावा कर रहे थे। 73 हजार 977 को बचत बताया गया।

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