Saroj Pandey Biography in Hindi: बीजेपी की इस महिला प्रत्‍याशी के नाम पर दर्ज है एक अनोखा वर्ल्‍ड रिकार्ड: पढ़ें- कैसे एक स्‍कूल प्रिंसिपल की बेटी ने सियासी रण में कई बार रचा इतिहास

Saroj Pandey Biography in Hindi: बीजेपी की इस महिला प्रत्‍याशी के नाम पर दर्ज है एक अनोखा वर्ल्‍ड रिकार्ड: पढ़ें- कैसे एक स्‍कूल प्रिंसिपल की बेटी ने सियासी रण में कई बार रचा इतिहास

Lokasabha Chunav 2024: रायपुर। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए बीजेपी के 195 प्रत्‍याशियों की सूची में एक महिला प्रत्‍याशी ऐसी हैं जिनके नाम पर एक वर्ल्‍ड रिकार्ड दर्ज है। यह वर्ल्‍ड रिकार्ड राजनीति के मैदान में ही उन्‍होंने बनाया है। करीब 15 साल पहले 2009 में बना यह रिकार्ड अब तक कोई तोड़ नहीं पाया है। सियासी मैदान में वर्ल्‍ड रिकार्ड बनाने वाली यह महिला नेत्री छत्‍तीगसढ़ की हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं सरोज पांडेय की। सरोज पांडेय को बीजेपी ने कोरबा सीट से लोकसभा चुनाव 2024 के रण में उतारा है।

सरोज पांडेय की पहचान तेजर्रार नेत्री की है। एक साधारण परिवार से निकली सरोज पांडेय ने न केवल प्रदेश बल्कि देश की राजनीति में अपनी पहचान बनाई है। वे बीजेपी महिला मोर्चा की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष रह चुकी हैं। बीजेपी की राष्‍ट्रीय महासचिव के पद पर भी काम कर चुकी हैं। वर्तमान वे पार्टी की राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष हैं। सरोज पांडेय ने दुर्ग मेयर रहते हुए सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने का रिकार्ड बनाया है। विधानसभा और लोकसभा का चुनाव जीता तो फिर एक रिकार्ड बनाया। सरोज पांडेय ने राज्‍यसभा चुनाव लड़ा तो वहां भी एक नया इतिहास लिखा गया।

सरोज पांडेय को पार्टी ने तीसरी बार लोकसभा चुनाव के रण में उतरी हैं। सबसे पहले उन्‍होंने 2009 में दुर्ग सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था।2009 में वे कांग्रेस के प्रदीप चौबे को हराकर पहली बार सांसद चुनी गईं। 2014 में भी पार्टी ने उन्‍हें दुर्ग से टिकट दिया, लेकिन वे कांग्रेस के ताम्रध्‍वज साहू से हार गईं।

उत्‍तर प्रदेश से आए थे सरोज पांडेय के परिजन

सरोज पांडेय के माता पिता उत्‍तर प्रदेश से आए थे। उनके पिता का नाम श्‍यामजी पांडेय और माता का नाम गुलाव देवी पांडेय हैं। मूलत: उत्‍तर प्रदेश के रहने वाले श्‍यामजी पांडेय शिक्षक थे। वे यहां भिलाई स्‍टील प्‍लांट (बीएसपी) के स्‍कूल में प्रिंसिपल थे। सरोज पांडेय का पूरा परिवार पहले बीएसपी के ही क्‍वाटर में रहता था। सरोज पांडेय का जन्‍म भिलाई में ही 22 जून 1968 को हुआ था। सरोज पांडेय से भिलाई स्थित महिला कॉलेज से एमएसी (बाल विकास) की डिग्री हासिल करने के बाद रायपुर के पंडित रविशंकर विश्‍वविद्यालय से पीएचडी की है।

सरोज पांडेय का सियासी सफरनामा

सरोज पांडेय के करीबी लोगों के अनुसार वे कॉलेज के दौरान ही छात्र राजनीति में सक्रिय थीं। इसके बाद बीजेपी की राजनीति में आ गई और दुर्ग जिला में सक्रिय रहीं। वर्ष 2000 में पहली बार उन्‍होंने चुनाव लड़ा। सरोज पांडेय को बीजेपी ने वर्ष 2000 में दुर्ग महापौर का चुनाव लड़ाया। सरोज पंडेय दुर्ग की मेयर चुनी गईं, फिर 2005 में वे लगातार दूसरी बार मेयर का चुनाव जीतीं। इसके बाद वे विधानसभा और लोकसभा का चुनाव लड़ीं। वे लोकसभा और राज्‍यसभा दोनों ही सदनों की सदस्‍य रह चुकी हैं।

राज्‍यसभा चुनाव में भी रचा इतिहास

छत्‍तीसगढ़ के करीब 24 वर्ष के इतिहास में राज्‍यसभा चुनाव के लिए केवल एक बार मतदान हुआ है। उस चुनाव में भी सरोज पांडेय शामिल थीं। यह बात 2018 के राज्‍यसभा चुनाव की है। तब भाजपा सत्‍ता में थी। पार्टी के कुल 49 विधायक थे। कांग्रेस के 39, बसपा का एक और एक निर्दलीय विधायक थे। विधायकों की संख्‍या के लिहजा से यह सीट भाजपा के खाते में जानी थी, लेकिन एन वक्‍त पर कांग्रेस ने प्रत्‍याशी खड़ा करने की घोषणा कर दी। साथ ही कांग्रेस ने संसदीय सचिवों को अयोग्‍य घोषित कराने की भी मुहिम चला दी। भाजपा की तरफ से सरोज पांडेय ने नामांकन दाखिल किया। वहीं, कांग्रेस ने लेखराम साहू को उनके सामने लाकर खड़ा कर दिया। साहू ने भी नामांकन दाखिल किया। संख्‍या बल भाजपा के पक्ष में था, बावजूद इसके पार्टी के नेताओं की धड़कने तेज थीं। क्रास वोटिंग के खतरे को देखते हुए मतदान के लिए सभी भाजपा विधायकों को सुबह सीएम हाउस बुलाया गया और वहां से सभी एक साथ मतदान करने विधानसभा भवन पहुंचें। निर्धारित तिथि पर मतदान हुआ। राज्‍य के 90 में से 87 विधायक मतदान में शामिल हुए। इसमें सरोज पांडेय के पक्ष में 51 वोट और कांग्रेस प्रत्‍याशी साहू के पक्ष में 36 मत पड़े। बसपा के केशव चंद्रा और निर्दलीय डॉ. विमल चोपड़ा ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया। वहीं, कांग्रेस के तीन विधायक अमित जोगी, सियाराम कौशिक और आरके राय मतदान में शामिल नहीं हुए।

जाने कैसे दर्ज हुआ सरोज पांडेय के नाम वर्ल्‍ड रिकार्ड

सरोज पांडेय 2005 में दुर्ग नगर निगम की दूसरी बार मेयर चुनी गईं। मेयर रहते 2008 में बीजेपी ने उन्‍हें वैशालीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया। सरोज पांडेय दिसंबर 2008 में विधायक निर्वाचित हो गईं। मेयर के साथ वे विधायक भी बन गईं। इसके अगले साल 2009 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्‍हें दुर्ग संसदीय सीट से चुनाव लड़ा दिया। सरोज पांडेय यह चुनाव भी जी गईं। इस तरह वे एक ही समय में मेयर, विधायक और सांसद रहीं। हालांकि बाद में उन्‍होंने छत्‍तीसगढ़ विधानसभा से इस्‍तीफा दे दिया, लेकिन इस बीच उनकी यह उपलब्धि वर्ल्‍ड रिकार्ड में दर्ज हो गया है।

मेयर की टिकट से लेकर राज्‍यसभा चुनाव तक संघर्ष

सरोज पांडेय का सियासी सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। उनके करीबी कहते हैं कि सरोज पांडेय को कोई भी चीज आसानी से नहीं मिलती है। 2000 में मेयर का टिकट भी उन्‍हें काफी संघर्ष के बाद मिला। सरोज पांडेय को टिकट दिए जाने का पार्टी के अंदर काफी विरोध था, लेकिन लखीराम अग्रवाल ने उन्‍हें टिकट दिया। 2018 में जब उन्‍होंने राज्‍यसभा का चुनाव लड़ा तो कांग्रेस ने भी उनके मुकाबले में प्रत्‍याशी खड़ा कर दिया।

सरोज पांडेय का चुनावी सफरनामा

वर्ष 2000 महापौर दुर्ग नगर निगम

वर्ष 2005 महापौर दुर्ग नगर निगम

वर्ष 2008 विधायक वैशाली नगर

वर्ष 2009 सांसद दुर्ग लोकसभा

वर्ष 2018 सांसद राज्‍यसभा

पार्टी संगठन में सरोज पांडेय

प्रदेश महामंत्री (छत्‍तीसगढ़)

राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष महिला मोर्चा

राष्‍ट्रीय महामंत्री

राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष

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