Ramadan Month:माह-ए-रमजान में रोजा- सेहरी-इफ्तार कब करेंगे, जानिए इसकी खासियत

Ramadan Month:माह-ए-रमजान में रोजा- सेहरी-इफ्तार कब करेंगे, जानिए इसकी खासियत

Ramadan 2024: इस्लाम धर्म का सबसे महत्वपूर्ण रमजान का महीना होता है। रमजान का महीना शुरू हो जाएगा और इसी दिन रमजान का पहला रोजा रखा जाएगा। इस्लाम धर्म में रोजा रखने का मतलब है, खुद को खुदा के लिए समर्पित करना. ये रोजा पूरे एक महीने तक सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त रखा जाता है। इसके साथ ही रमजान के महीने में सहरी और इफ्तार की परंपरा भी निभाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सहरी और इफ्तार की परंपरा कैसे निभाई जाती है।

इस्लामिक परंपराओं के अनुसार, रमजान के महीने में रोजा रखने वाले अगर सुबह सूर्योदय से पहले कुछ खा लेते हैं तो उसे सहरी कहते हैं और पूरे दिन इबादत कर शाम को सूर्यास्त के बाद खुदा से दुआ करने के बाद उपवास तोड़ा जाता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है। रोजे के दौरान कुछ भी खाने या पीने की अनुमति नहीं होती है। जानते हैं कि किस शहर में कितने बजे सहरी और इफ्तार की परंपरा निभाई जाएगी।

 सहरी और इफ्तार का समय

रमजान: मार्च /अप्रैल 2024: दिन: सहरी का अंतिम समय: इफ्तार का समय: इतने घंटे का रोजा

12 मार्च: मंगलवार : सहरी सुबह 4:49 बजे : इफ्तार शाम 6:07 बजे : 13 घंटा 18 मिनट

13 मार्च: बुधवार : सहरी सुबह 4:47 बजे : इफ्तार शाम 6:08 बजे : 13 घंटा 21 मिनट

 14 मार्च: गुरुवार : सहरी सुबह 4:46 बजे : इफ्तार शाम 6:08 बजे : 13 घंटा 22 मिनट

 15 मार्च: शुक्रवार : सहरी सुबह 4:45 बजे : इफ्तार शाम 6:09 बजे : 13 घंटा 24 मिनट

 16 मार्च: शनिवार : सहरी सुबह 4:44 बजे : इफ्तार शाम 6:10 बजे : 13 घंटा 26 मिनट

17 मार्च : रविवार : सहरी सुबह 4:43 बजे : इफ्तार शाम 6:10 बजे : 13 घंटा 27 मिनट

18 मार्च: सोमवार : सहरी सुबह 4:42 बजे : इफ्तार शाम 6:10 बजे : 13 घंटा 28 मिनट

19 मार्च : मंगलवार : सहरी सुबह 4:41 बजे : इफ्तार शाम 6:11 बजे : 13 घंटा 30 मिनट

20 मार्च: बुधवार : सहरी सुबह 4:40 बजे : इफ्तार शाम 6:11 बजे : 13 घंटा 31 मिनट

21 मार्च: गुरुवार : सहरी सुबह 4:39 बजे : इफ्तार शाम 6:12 बजे : 13 घंटा 33 मिनट

22 मार्च: शुक्रवार : सहरी सुबह 4:37 बजे : इफ्तार शाम 6:12 बजे : 13 घंटा 35 मिनट

 23 मार्च: शनिवार : सहरी सुबह 4:36 बजे : इफ्तार शाम 6:13 बजे : 13 घंटा 37 मिनट

24 मार्च: रविवार : सहरी सुबह 4:35 बजे : इफ्तार शाम 6:13 बजे : 13 घंटा 38 मिनट

25 मार्च : सोमवार : सहरी सुबह 4:34 बजे : इफ्तार शाम 6:14 बजे : 13 घंटा 40 मिनट

 26 मार्च: मंगलवार : सहरी सुबह 4:33 बजे : इफ्तार शाम 6:14 बजे : 13 घंटा 41 मिनट

27 मार्च: बुधवार : सहरी सुबह 4:32 बजे : इफ्तार शाम 6:15 बजे : 13 घंटा 43 मिनट

 28 मार्च: गुरुवार : सहरी सुबह 4:30 बजे : इफ्तार शाम 6:15 बजे : 13 घंटा 45 मिनट

29 मार्च: शुक्रवार : सहरी सुबह 4:29 बजे : इफ्तार शाम 6:16 बजे : 13 घंटा 47 मिनट

30 मार्च: शनिवार : सहरी सुबह 4:28 बजे : इफ्तार शाम 6:16 बजे : 13 घंटा 48 मिनट

31 मार्च: रविवार : सहरी सुबह 4:27 बजे : इफ्तार शाम 6:17 बजे : 13 घंटा 50 मिनट

1 अप्रैल: सोमवार : सहरी सुबह 4:26 बजे : इफ्तार शाम 6:17 बजे : 13 घंटा 51 मिनट

2 अप्रैल: मंगलवार : सहरी सुबह 4:24 बजे : इफ्तार शाम 6:18 बजे : 13 घंटा 54 मिनट

3 अप्रैल: बुधवार : सहरी सुबह 4:23 बजे : इफ्तार शाम 6:18 बजे : 13 घंटा 55 मिनट

4 अप्रैल: गुरुवार : सहरी सुबह 4:22 बजे : इफ्तार शाम 6:19 बजे : 13 घंटा 57 मिनट

 5 अप्रैल: शुक्रवार : सहरी सुबह 4:21 बजे : इफ्तार शाम 6:19 बजे : 13 घंटा 58 मिनट

 6 अप्रैल: शनिवार : सहरी सुबह 4:20 बजे : इफ्तार शाम 6:20 बजे : 14 घंटा 00 मिनट

 7 अप्रैल: रविवार : सहरी सुबह 4:18 बजे : इफ्तार शाम 6:20 बजे : 14 घंटा 02 मिनट

8 अप्रैल: सोमवार : सहरी सुबह 4:17 बजे : इफ्तार शाम 6:21 बजे : 14 घंटा 04 मिनट

 9 अप्रैल: मंगलवार : सहरी सुबह 4:16 बजे : इफ्तार शाम 6:21 बजे : 14 घंटा 05 मिनट

10 अप्रैल: बुधवार : सहरी सुबह 4:15 बजे : इफ्तार शाम 6:22 बजे : 14 घंटा 07 मिनट

रमजान का महीना जानें क्यों खास है

इस्लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पाक और महत्वपूर्ण माना गया है. मुस्लिम समाज के लोग इस पूरे महीने रोजा यानी उपवास रखते हैं और अपना ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में बिताते हैं और अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए इस महीने के आखिर में ईद-उल-फितर मनाते हैं. जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना इतना पाक इसलिए माना गया है क्योंकि इस महीने में पैगंबर मोहम्मद साहब को साल 610 में लैलतुल-कद्र के मौके पर इस्लाम धर्म की पवित्र किताब कुरआन शरीफ मिली थी. बताया जाता है कि रमजान के महीने में तरावीह की नमाज अदा की जाती है. इस नमाज की खास बात ये है कि रमजान की पूरी अवधि में इमाम साहब तरावीह की नमाज में पूरा कुरआन सुनाते हैं.

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