Jharkhand News: आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा: फिजिकल टेस्ट के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत, CM ने दिए जांच के आदेश

Jharkhand News: आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा: फिजिकल टेस्ट के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत, CM ने दिए जांच के आदेश

Jharkhand News: रांची: झारखंड से बड़ी खबर सामने आयी है. आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा(Excise Constable Recruitment Exam) भर्ती के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान केंद्रों पर 11 अभ्यर्थियों की मौत हो गयी है.

दरअसल, झारखंड में आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए 22 अगस्त से शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट का आयोजन किया गया था. फिजिकल टेस्ट के लिए राज्य के रांची, गिरिहीड, हजारीबाग, पलामू, पूर्वी सिंहभूम और साहेबगंज जिलों में कुल सात केंद्र बनाये गए थे. फिजिकल टेस्ट के लिए अलग अलग जिलों से 30 अगस्त तक कुल 1,27,772 अभ्यर्थी पहुंचे थे. जिनमें से 78 हजार 23 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं.

वहीँ, टेस्ट के दौरान केंद्र पर ही 11 अभ्यर्थियों की मौत हो गयी. जिसमे पलामू में 4, गिरिडीह और हजारीबाग में 2–2 ,रांची के जगुआर केंद्र, पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी और साहेबगंज केंद्रों में एक-एक अभ्यर्थी की मौत हुई है. फिटनेस टेस्ट के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत से हड़कंप मच गया है. इस मामले में अप्राकृतिक मौत के केस दर्ज कर किये गए है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है. 

इस सम्बन्ध में झारखंड पुलिस के आईजी ऑपरेशन अमोल विनुकांत होमकर ने कहा, झारखंड आबकारी कांस्टेबल भर्ती के लिए राज्य में सात केंद्र बनाए गए हैं. सभी केंद्रों पर चिकित्सा दल, दवाईयां, एम्बुलेंस और पेयजल समेत पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी. दुर्भाग्य से आबकारी कांस्टेबल भर्ती अभियान के दौरान शारीरिक परीक्षण के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत हो गई, जांच जारी है. इस मामले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जांच के आदेश दिए है. 

घटना को लेकर लोगो में आक्रोश देखा जा रहा है. युवाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.  जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से झारखंड भारतीय जनता युवा मोर्चा के द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया. झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, सरकार जिस तरह से अभ्यर्थियों को दौड़ाती है (शारीरिक परीक्षण), वैसा नहीं होता. अभ्यर्थियों को तीन महीने पहले बताया जाना चाहिए कि उन्हें कब दौड़ना है, ताकि वे अभ्यास कर सकें. एडमिट कार्ड मिलने के 15 दिनों के भीतर उन्हें दौड़ना होता है…कल मैंने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल के कुछ बच्चों से बात की…उन्होंने बताया कि एक केंद्र पर 6000 बच्चों को दौड़ाया जाता है और उन्हें सुबह 12 बजे से लाइन में खड़ा किया जाता है और उनका नंबर दोपहर 12 बजे आता है. इसलिए उन्हें सोने का मौका नहीं मिलता…हेमंत सोरेन बच्चों को नौकरी नहीं बल्कि मौत दे रहे हैं. 

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