सीनियर अफसर जूनियर को कैसे करेंगे रिपोर्टिंग, जूनियर कैसे लिखेगा सीआर…जोन कमिश्नर को जिले के इस नगर पालिका में बना दिया है सीएमओ

सीनियर अफसर जूनियर को कैसे करेंगे रिपोर्टिंग, जूनियर कैसे लिखेगा सीआर…जोन कमिश्नर को जिले के इस नगर पालिका में बना दिया है सीएमओ

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में एक राेचक मामला आया है। राज्य शासन के तबादला आदेश से प्रभाावित रायपुर नगर निगम के जोन कमिश्नर से अपनी याचिका में बताया है कि उसे बिलासपुर जिले के तखतपुर नगर पालिका का सीएमओ बना दिया है। सीएमओ को ज्वाइन डायरेक्टर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को रिपोर्टिंग करनी पड़ती है। वर्तमान में ज्वाइन डायरेक्टर उनसे जूनियर है। जूनियर अफसर को एक सीनियर अफसर किस हिसाब से रिपोर्टिंग करेगा। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता इंजीनियर के तबादला आदेश पर रोक लगा दी है।

21 अगस्त 2024 को राज्य शासन ने एक आदेश जारी कर नगर निगम रायपुर के जोन कमिश्नर पद पर पदस्थ रमेश जायसवाल का बिलासपुर जिले के नगर पालिका परिषद तखतपुर स्थानांतरण करते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर पदस्थापना आदेश जारी कर दिया। नगरीय प्रशासन विभाग के इस आदेश को चुनौती हुए अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने बताया है कि उसका मूल पद मुख्य कार्यपालन अधिकारी है। वर्तमान में वह नगर निगम रायपुर में जोन कमिश्नर रायपुर के पद पर कार्य करते आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन ने एक आदेश जारी कर उसे नगर पालिका परिषद तखतपुर में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर पदस्थ कर दिया है।

सीनियर और जूनियर रैंक ने फंसाया पेंच

मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मतिन सिद्दीकी ने राज्य शासन द्वारा निर्धारित रैंक का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का जिस नगर पालिका में स्थानांतरण किया गया है वह संयुक्त संचालक बिलासपुर के अधीन आता है। संयुक्त संचालक के पद पर याचिकाकर्ता से जूनियर राकेश जायसवाल कार्यरत है। ऐसी स्थिति में यदि याचिकाकर्ता नगर पालिका परिषद तखतपुर में कार्यभार ग्रहण करते हैं तो, रिपोर्टिंग अपने जूनियर अफसर राकेश जायसवाल को करना पड़ेगा।

जूनियर अफसर राकेश जयसवाल याचिकाकर्ता के सर्विस बुक का संधारण भी करेंगे। अधिवक्ता सिद्धीकी ने कहा कि यह तो राज्य शासन द्वारा किए गए मापदंड के विपरीत होगा। इसके अलावा राज्य शासन ने अपने ही बनाए नियमों काे जाने अनजाने में उल्लंघन कर दिया है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने और अभ्यावेदन पर नियमानुसार कार्रवाई का निर्देश राज्य शासन को दिया है। कोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी है कि तब तक याचिकाकर्ता को रायपुर नगर निगम के जोन कमिश्नर के पद से कार्यमुक्त ना किया जाए।

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