Rajasthan DGGI Raid: कांग्रेस नेता के ठिकानों पर DGGI की रेड, घर और गोदामों पर की छापेमारी

Rajasthan DGGI Raid: कांग्रेस नेता के ठिकानों पर  DGGI  की रेड, घर और गोदामों पर की छापेमारी

Rajasthan DGGI Raid: राजस्थान के भीलवाड़ा में बुधवार सुबह डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने कांग्रेस नेता के ठिकानों पर DGGI की रेड, घर और गोदामों पर की छापेमारी के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की. यह रेड नारायणीवाल के घर और उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर की गई, जिसमें उनकी फर्म ‘भीलवाड़ा स्क्रैप’ और ‘कामधेनु सरिया’ के गोदाम शामिल हैं.

कार्रवाई के समय करीब आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे. इस कार्रवाई ने भीलवाड़ा के व्यापारिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, लेकिन DGGI के अधिकारियों ने इस कार्रवाई के संबंध में फिलहाल कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

रेड की कार्रवाई में DGGI की टीम ने उनकी फर्म ‘भीलवाड़ा स्क्रैप’ और ‘कामधेनु सरिया’ के दो गोदामों की जांच की. नारायणीवाल की कंपनी को भीलवाड़ा में कामधेनु सरिया की डीलरशिप प्राप्त है. अधिकारियों ने इन गोदामों और उनके घर पर जांच की, जिसके दौरान विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों की जांच की जा रही है. हालांकि, इस रेड के बारे में टीम ने अभी तक कोई भी विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा नहीं की है, जिससे यह आशंका बनी हुई है कि यह कार्रवाई टैक्स चोरी, फर्जीवाड़ा या अन्य व्यापारिक अनियमितताओं के संदर्भ में हो सकती है.

नारायणीवाल के व्यापारिक विस्तार

ओम नारायणीवाल, जो कि भीलवाड़ा के एक प्रमुख कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं, विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाई है. उनके द्वारा चलाए गए व्यापारों में मुख्य रूप से स्क्रैप की बिक्री, सरिया और निर्माण सामग्री का कारोबार शामिल है. उनकी फर्म ‘भीलवाड़ा स्क्रैप’ जो कि गांधी नगर मिर्च मंडी के पास स्थित है, क्षेत्र के प्रमुख व्यापारिक प्रतिष्ठानों में से एक मानी जाती है. इसके अलावा, ‘कामधेनु सरिया’ का कारोबार भी उनकी व्यावसायिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें उनकी डीलरशिप भीलवाड़ा में प्रमुख है.

नारायणीवाल का राजनीतिक इतिहास

ओम नारायणीवाल का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है. वह कांग्रेस पार्टी से भीलवाड़ा विधानसभा सीट से 2023 में उम्मीदवार बने थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके पहले, उन्होंने 2018 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, और उस समय भी वह दूसरे स्थान पर रहे थे. कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के बाद, यह माना जा रहा था कि उनका राजनीतिक करियर एक नए मुकाम पर पहुंच सकता था, लेकिन चुनाव में असफलता ने उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को झटका दिया.

नारायणीवाल भीलवाड़ा नगर परिषद के सभापति पद पर भी रह चुके हैं, और उनके पास नगर निगम की गतिविधियों का लंबा अनुभव रहा है. इसके अलावा, उनका व्यापारिक और राजनीतिक प्रभाव भी शहर और जिले में महत्वपूर्ण माना जाता है.

आगे की जांच और संभावित परिणाम

DGGI की टीम ने फिलहाल कार्रवाई के दौरान कोई खास जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन जानकारों के मुताबिक, यह मामला काफी जटिल हो सकता है. यदि जांच में यह पाया जाता है कि नारायणीवाल और उनकी कंपनियों ने टैक्स से संबंधित कोई गड़बड़ी की है या अवैध रूप से धन अर्जित किया है, तो उन्हें बड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, अगर यह पता चलता है कि उन्होंने राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाया है, तो राजनीतिक माहौल में भी हलचल मच सकती है.

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