भ्रष्टाचार पर सीएम का सख्त प्रहार, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार, राडार पर भ्रष्ट तंत्र

भ्रष्टाचार पर सीएम का सख्त प्रहार, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार, राडार पर भ्रष्ट तंत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। मुख्यमंत्री ने सत्ता में आते ही साफ कर दिया था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके तेवर हमेशा सख्त रहेंगे। पहले कलेक्टर-एसपी कान्फ्रेंस में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस को लेकर उन्होंने कलेक्टर, एसपी को सख्त निर्देश दिए थे। भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की कड़ाई जमीनी स्तर पर भी उतनी ही सख्त नजर आ रही है।

एक बार फिर 324 करो़ड़ के मुआवजा घोटाले में मुख्यमंत्री ने अपने सख्त तेवर दिखाए। जिसके बाद भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम तक बन रही इकोनॉमिक कॉरिडोर में जमीन अधिग्रहण मामले में घोटाले की जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंपा गया है। मामले में सरकार के एक्शन में आते ही पहले एसडीएम और फिर डिप्टी कलेक्टर पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार को लेकर किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही उन्हें बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब मुख्यमंत्री के ये तेवर भ्रष्टाचार के खिलाफ दिखाई दिए हैं। सीएम के रौद्र रूप कई प्रशासनिक निर्णयों में दृष्टिगोचर हुए हैं। सीएम शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों में बिलकुल भी लापरवाही नहीं चाहते।

मुख्यमंत्री ने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने वाले लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कारवाई करने के निर्देश पहले ही दिए हुए हैं। उन्होंने कहा है कि यह सुशासन की सरकार है और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के द्वारा अपने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी तथा लापरवाह अधिकारियों पर तत्काल कड़ी कारवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पहले भी दिखे सख्त तेवर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन से साफ है कि इस राज्य में अब प्रशासनिक ढिलाई के दिन बीत चुके हैं। यदि किसी ने लापरवाही या भ्रष्टाचार किया, तो उस पर कार्यवाही अवश्य होगी। पिछले डेढ़ साल के दौरान ऐसे कई मौके आए, जब मुख्यमंत्री का ये सख्त अंदाज नजर आया। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा छापी गई शैक्षणिक सत्र 2024-25 की नई किताबों को कबाड़ में बेचे जाने का मामला सामने आया था। जिसके बाद उन्होंने तत्काल गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव रेणु पिल्ले को इस घटना की जांच के निर्देश दिए थे। साथ ही पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर प्रेम प्रकाश शर्मा की प्रथम दृष्टया लापरवाही परिलक्षित होने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

जल जीवन मिशन में हुए भ्रष्टाचार की बात सामने आई। वहां पर टंकियां और पाइपलाइन बिछा दी गईं, जहां पानी का स्रोत ही नहीं था। कांग्रेस की सरकार के दौरान हुए पीएससी परीक्षा घोटाले में कांग्रेस नेताओं और पीएससीअधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ, जिससे युवाओं के सपने टूट गए। साथ ही चर्चित महादेव एप घोटाले का जिक्र करते हुए कांग्रेस सरकार के संरक्षण में सट्टे और गैर-कानूनी धंधों को बढ़ावा मिला। आबकारी नीति में बदलाव कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

सभी मामलों में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए जांच कराई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला अब तक जारी है। बीजापुर जिले के भैरमगढ़, भोपालपट्टम और उसूर ब्लॉकों में जीएडी आवास भवनों के निर्माण कार्यों में मिली शिकायतों के बाद वित्तीय अनियमितताएं और काम में देरी की बात सामने आई। जिसके बाद ठेकेदार मेसर्स एन. के. कंस्ट्रक्शन दुर्ग के पंजीयन को निरस्त कर नोटिस जारी किया गया।

जनता को हम पर भरोसा साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने काफी पहले दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए अपनी मंशा जाहिर कर दी थी कि प्रदेश की जनता का भरोसा हमारी सरकार पर बढ़ा है। मुझे राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। स्वभाव से मैं विनम्र हूं। भगवान ने मुझे सीधा बनाया है। लेकिन जनहित के मामले में कड़े निर्णय लेने से मैं पीछे नहीं हटता। इसी कड़ी में प्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए सभी क्षेत्रों में आईटी का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल शुरू हो गया है। तीन पोर्टलों ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम् पोर्टल की शुरूआत की गई है। इस पहल से सुशासन के साथ शासकीय कामकाज में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ा है।

ईओडब्ल्यू करेगी घोटाले की पूरी जांच

भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम तक बन रही इकोनॉमिक कॉरिडोर में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर एनएचएआई को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। एसडीएम, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया। मामले को लेकर एनपीजी लगातार खबरें प्रकाशित कर पूरे स्कैम का पर्दाफाश कर रहा था। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और फिर पहले एसडीएम और फिर डिप्टी कलेक्टर को सस्पेंड किया गया। मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी गूंजा और विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग के बाद विष्णु देव साय की सरकार ने पूरे घोटाले की जांच का जिम्मा ईओडब्ल्यू को सौंप दिया है। रायपुर-विशाखापट्टनम सिक्स लेन ग्रीन कारिडोर के बहुचर्चित मुआजवा घोटाले में राज्य सरकार ने डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड कर दिया। शशिकांत मुआवजा घोटाले के दौरान अभनपुर के तहसीलदार रहे। उन्हें 324 करोड़ के स्कैम का मास्टरमाइंड बताया जाता है।

एनपीजी न्यूज लगातार इस स्कैम का पर्दाफाश कर रहा है। एनपीजी की खबर पर एक दिन पहले अभनपुर के एसडीएम निर्भय साहू को सरकार ने सस्पेंड किया था। इसके बाद दूसरे दिन राज्य सरकार इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए डिप्टी कलेक्टर शशिकांत को सस्पेंड कर दिया। अभनपुर के भारतमाला परियोजना के 324 करोड़ के मुआवजा घोटाले में रायपुर कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार को मास्टरमाइंड बताया है। घोटाले को अंजाम देने वाले तहसीलदार को सरकार ने 2021 में प्रमोट कर डिप्टी कलेक्टर बना दिया। फिलवक्त, एक मंत्री के करीबी होने की वजह से राजस्व विभाग उन पर हाथ नहीं डाल रहा। उधर, उन सेठ-साहूकारों और भूमाफियाओं का क्या होगा, जिन्होंने इस जमीनों के बटांकन का खेल करते हुए 248 करोड़ अंदर कर लिया। राजस्व विभाग के अफसरों की बेपरवाही देखिए कि 326 करोड़ के स्कैम में अभी तक सामान्य सी रिपोर्ट भी थाने में दर्ज नहीं कराई गई है।

NPG की लगातार 9 खबरों से मचा हड़कंप

केंद्र सरकार की परियोजना में 324 करोड़ रुपए के घोटाले के खिलाफ छत्तीसगढ़ के सबसे तेज और विश्वसनीय न्यूज प्लेटफार्म एनपीजी न्यूज ने लगातार नौ खबरें छापी। एनपीजी न्यूज ने सबसे पहले इस घोटाले का भंडाफोड़ किया। यही नहीं, एक के बाद एक लगातार नौ खबरें प्रकाशित की गई। सरकार ने एक्शन लेते हुए अभनपुर के तत्कालीन एसडीएम और वर्तमान जगदलपुर नगर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सरकार ने सस्पेंड कर दिया। डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को घोटाले का मास्टरमाइंड शीर्षक से छपी खबर के दो घंटे के भीतर सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।

विधानसभा गरमाने के बाद जांच का ऐलान

कैबिनेट मीटिंग में ईओडब्ल्यू को जांच सौंपने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। भ्रष्टाचार की खबरें एनपीजी न्यूज में लगाए जाने के बाद इसका मुद्दा विधानसभा में खूब गरमाया था। इस दौरान विभागीय मंत्री टंकराम वर्मा ने भ्रष्टाचार होने की बात स्वीकार की। उन्होंने हंगामे के बीच संभागीय आयुक्त से जांच कराने की घोषणा की, लेकिन विपक्ष सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा रहा। विधानसभा में चर्चा के दौरान राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्वीकार किया कि भारत माला परियोजना में अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद रकबे के टुकड़े कर दिए गए। पहले से अधिकृत भूमि का दोबारा भू-अर्जन किया गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के जवाब पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि सिर्फ विभागीय जांच से दोषियों को बचने का मौका मिल जाएगा। यह एक बड़ा घोटाला है, जिसमें कई प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं। दोनों राजनीतिक दलों के लोग भी इसमें मिले हो सकते हैं। महंत ने कहा कि सिर्फ निलंबन से कुछ नहीं होगा, बल्कि दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजना चाहिए। निलंबन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे दोषी कुछ समय बाद फिर बहाल हो जाते हैं और उसी तरह से काम करते हैं।

इसलिए हुई कार्रवाई

भारत सरकार के भारतमाला परियोजना में 324 करोड़ के घोटाले पर बवाल मचने पर सरकार ने तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू को सस्पेंड कर दिया। मगर जमीनों के खसरे का बटांकन का काम तहसीलदार करता है, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस स्कैम में अभनपुर एसडीएम समेत गोबरा नवापारा के तहसीलदार और दो पटवारी सस्पेंड हो चुके हैं। जबकि, गोबरा नवापारा के तहसीलदार के इलाके में उतना बड़ा खेला नहीं हुआ है। 80 प्रतिशत से अधिक मुआवजा शशिकांत के इलाके में बंटा। मगर उनके मामले में सिस्टम मौन नजर आया।

एनपीजी ने खबर लगाई कि मुआवजा घोटाले के दौरान 2019 से लेकर 2021 तक शशिकांत अभनपुर के तहसीलदार रहे। मुआवजा के खेल का शशिकांत सूत्रधार रहे। शशिकांत ने ही 32 खसरों को 247 छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया ताकि लोगों को आठ गुना मुआवजा दिलाया जा सके। रायपुर कलेक्टर ने राजस्व विभाग को जांच रिपोर्ट भेजी, उसमें भी तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत की इस स्कैम में मुख्य भूमिका बताई गई है। जाहिर सी बात है कि एसडीएम बिना तहसीदार की मदद से इतना बड़ा स्कैम नहीं कर सकता। ये अवश्य है कि 3ए के प्रकाशन के बाद जमीनों के नक्शा, खसरा में परिवर्तन किया गया, इस पर आंख मूंदते हुए दोनों एसडीएम ने करोड़ों का मुआवजा बांट दिया।

तहसीलदार का प्रमोशन

मुआवजा घोटाले को अंजाम देने वाले तहसीलदार को 2021 में प्रमोट कर डिप्टी कलेक्टर बना दिया गया और उनकी पोस्टिंग कोरबा में थी। रायपुर कलेक्टर समेत राजस्व विभाग में सभी को मालूम है कि तत्कालीन तहसीलदार की इस घोटाले में अहम भूमिका रही। मगर तत्कालीन तहसीलदार के एक मंत्री के करीबी होने की वजह से उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ है।

भूमाफियाओं का क्या होगा?

भारतमाला परियोजना में 324 करोड़ के मुआवजे के लिए सेठ-साहूकारों ने सिक्स लेन ग्रीन कारिडोर के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीनों को प्रतिबंध लगने के बाद भी पत्नी, बेटे-बेटी, नौकर-चाकर के नाम बंटवारा कर दिया, ताकि आठ गुना मुआवजा हासिल की जा सकें। खेल यहां तक हुआ कि किसानों से एग्रीमेंट कर जमीनों को पैसा दे दिया और अलग से खाता खुलवाकर उसमें पैसा ट्रांसफर कराया और बाद में अपने खाते में पैसे आहरण करा लिया। भारतमाला परियोजना में जिनकी जमीनें अधिग्रहित हुई, उसके किसानों की जमीनें लेकर उसका खाता महासमुंद के आईसीआईसी बैंक में खुलावाया गया। ताकि किसानों से आसानी से पैसे अपने खाते में ट्रांसफर कराया जा सकें।

247 टुकड़ों में बांटी 32 जमीन

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जिस लिस्ट को कलेक्टर को भेजकर जांच करने कहा था, नियम विरूद्ध बंटवारे की कलेक्टर की जांच में पुष्टि हो गई है। लिस्ट में एक ही परिवार के नाम पर कई टुकड़े कर दिए गए। लिस्ट में कई जगह भारतमाला परियोजना लिखा है, इसका मतलब है कि उक्त टुकड़ा नेशनल हाईवे के नाम पर चढ़ गया है। कुछ नाम नौकर-चाकर और किसानों के हैं, जिनसे एग्रीमेंट कर जमीनें हथिया ली गई और उसे टुकड़ों में बांट मुआवजा ले लिया गया। 32 जमीनों को 247 टुकड़ों में विभक्त किए गए, उनकी कुछ सूची हम प्रकाशित कर रहे हैं, सवाल उठता है, प्रतिबंध के बाद भी राजस्व अधिकारियों से मिल छोटे टुकड़े करा करोड़ों रुपए का मुआवजा हथिया लेने वाले भूमाफियाओं और सेठ-साहूकारों के खिलाफ राजस्व विभाग कोई कार्रवाई करेगा?

324 करोड़ के स्कैम, एफआईआर नहीं

भारत सरकार की परियोजना में 324 करोड़ का वारा-न्यारा हो गया, मगर राजस्व विभाग ने अभी तक थाने में सामान्य रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई है। जबकि, छोटे-छोट मामलों में पुलिस में कंप्लेन हो जाता है। स्कूल शिक्षा विभाग के फर्जी तबादला आदेश में कल ही स्कूल शिक्षा के अफसरों ने नया रायपुर के राखी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

ये है प्रोजेक्ट

रायपुर से विशाखापटनम की दूरी कम करने के लिए भारत सरकार याने नेशनल हाईवे 25 हजार करोड़ की लागत से 464 किलोमीटर लंबी सिक्स लेन एक्सप्रेस वे बना रहा है। छत्तीसगढ़ में इसके तहत 124 किलोमीटर रोड बनाया जाएगा। उसके बाद 240 किलोमीटर ओड़िसा में और फिर आंध्रप्रदेश में 100 किलोमीटर का हिस्सा आएगा। छत्तीसगढ़ की यह पहली परियोजना है जो 6 लेन पूरी तरह दोनों तरफ से बंद होगी किसी प्रकार का जानवर या अन्य कोई प्रवेश नहीं कर पायेगा। इस रोड पर प्रवेश के लिए जहां रास्ता बनाया जायेगा उसी स्थल से ही प्रवेश हो पायेगा। तैयार होने पर रायपुर से विशाखापटनम की दूरी 590 किमी से घटकर 464 किमी हो जाएगी और यात्रा का समय 14 घंटे से घटकर लगभग 7 घंटे हो जाएगा। वर्तमान में विशाखापट्टनम और छत्तीसगढ़ के बीच में लगभग 3 लाख मीट्रिक टन माल का आना जाना होता है। यह रोड बनने से समुद्री मांग से आने वाले माल की ढुलाई आसान होगी जिससे व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।

घिसट-घीसटकर चल रहा काम

एक्सप्रेस वे का ओडिशा और आंध्रप्रदेश के हिस्से में काम जोर-शोर से चल रहा है। मगर किसानों के विरोध की वजह से अभनपुर के पास काम घिसट-घीसटकर चल रहा है। पिछली सरकार में कभी डीएफओ ने काम रोकवा दिया तो कभी अभनपुर एसडीएम ने। एनएच के अधिकारियों ने रायपुर कलेक्टर के पास मुआवजा प्रकरण की जांच के लिए गुहार लगाई मगर चार साल से उस पर कोई फैसला नहीं हो पाया। उधर किसान मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए बार-बार निर्माण कार्यो के पास प्रदर्शन कर काम रोक दे रहे हैं। 464 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे रायपुर के पास अभनपुर से शुरू होगा और विशाखापत्तनम के बाहरी इलाके में सब्बावरम तक जाएगा। इसे 2025 तक पूरा होने का टारगेट था। मगर जिस रफ्तार से काम चल रहा 2026 में भी पूरा हो जाए तो बहुत है।

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