CM Sai's Delhi visit: दिल्ली में मोदी और शाह से मिले सीएम साय: यहां कैबिनेट में शामिल होने वाले नामों और शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर अटकलबाजी शुरू…

CM Sai’s Delhi visit: रायपुर। प्रदेश कैबिनेट का विस्तार होना है। कैबिनेट में 2 नए चेहरे शामिल किए जाने हैं। वहीं, कुछ मंत्रियों के प्रभार में फेरबदल की भी लंबे समय से चर्चा है। कल (सोमवार) की रात को सीएम विष्णुदेव साय के दिल्ली की उड़ानभरने के साथ ही मंत्री पद के दावेदार ही नहीं मंत्रियों की भी धड़कने तेज हैं। आज दिल्ली में सीएम विष्णुदेव साय के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद संभावित मंत्रियों के नाम और शपथ गहण की तारीखों को लेक अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
इधर, भरोसेमंद सूत्रों का दावा है कि सीएम साय दिल्ली से कैबिनेट का पूरा फार्मूला लेकर लौटेंगे। उनके पास वो दो नाम भी होंगे जिन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। बताते चले कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्यों की संख्या 90 है। ऐसे में यहां मुख्यमंत्री सहित 13 मंत्री बनाए जा सकते हैं। दिसंबर में सीएम के साथ 11 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण किया था। एक पोस्ट खाली रखा गया था। इस बीच कैबिनेट मंत्री हरे बृजमोहन अग्रवाल रायपुर संसदीय सीट से चुनाव जीत गए हैं।इसकी वजह से उन्होंने विधानसभा की सदस्यता और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इस तरह राज्य में अब मंत्री के कुल 2 पद रिक्त हैं।
जुलाई प्रथम सप्ताह में शपथ
छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव साय मंत्रिपरिषद में इस समय दो पद रिक्त हो गए हैं। 12 मंत्रियां के कोटा वाले राज्य में अगर दो मंत्री कम हो तो निश्चित तौर पर कामकाज प्रभावित होगा। मगर खबर है कि जल्द ही दो नए मंत्रियों को शपथ दिलाया जाएगा। जुलाई फर्स्ट वीक तक किसी भी सूरत में दो मंत्रियों की नियुक्ति हो जाएगी। मगर राजनीतिक पंडितों का भी मानना है कि छत्तीसगढ़ के जातीय समीकरण की दृष्टि से दो मंत्रियों का चयन इतना आसान नहीं होगा। खासकर, लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद।
ओबीसी का पलड़ा भारी
विष्णुदेव मंत्रिमंडल में ओबीसी का पलड़ा भारी है। अगर दो रिक्त पदों में से किसी एक पर ओबीसी विधायक को मंत्री बनाना होगा तो छह में से एक मंत्री से सरकार को इस्तीफा लेना होगा। क्योंकि 12 में सात मंत्री ओबीसी से तो कतई संभव नहीं। फिर बस्तर से हमेशा दो मंत्री रहे हैं। छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका कि सरगुजा से रामविचार नेताम, श्यामबिहारी जायसवाल और लक्ष्मी राजवाड़े याने तीन मंत्री और बस्तर से सिर्फ एक…केदार कश्यप। ऐसे में, लता उसेंडी की संभावना बढ़ रही है। लता को सरकार अगर मंत्री बनाती हैं तो वे आदिवासी के साथ महिला वर्ग का प्रतिनिधित्व करेंगी। लिहाजा सरकार को उनके मंत्री बनाने से दो फायदे होंगे। लता रमन सिंह मंत्रिमंडल में 10 साल मंत्री रह चुकी हैं।
सामान्य वर्ग से सबसे कम मंत्री
अब सामान्य वर्ग की बात….अजीत जोगी सरकार में सामान्य वर्ग से पांच मंत्री रहे। उस समय विधानसभा अध्यक्ष भी इसी वर्ग से रहे। राजेंद्र शुक्ला को अजीत जोगी ने स्पीकर बनाया था। उनके अलावा रविंद्र चौबे, सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ल, विधान मिश्रा और गीता देवी सिंह। उसके बाद रमन सिंह की सरकार 15 साल रही। उसमें भी तीन मंत्री इस वर्ग से रहे। मगर इस समय बृजमोहन के इस्तीफे के बाद सिर्फ एक मंत्री सामान्य वर्ग से बच गए हैं। जाहिर सी बात है कि सरकार सामान्य वर्ग से एक मंत्री तो लेगी ही। इनमें राजेश मूणत से लेकर अमर अग्रवाल, भावना बोहरा जैसे कोई भी एक नाम हो सकता है। अब देखना है, सरकार इनमें से किन दो विधायकों को शपथ ग्रहण के लिए राजभवन बुलाती है।
इन छह के नामों की चर्चाएं
विष्णुदेव मंत्रिमंडल के दो पदों के लिए आधा दर्जन नामों की चर्चा बड़ी तेज है। इनमें रायपुर से राजेश मूणत, कुरुद के अजय चंद्राकर, बिलासपुर से अमर अग्रवाल, दुर्ग से गजेंद्र यादव और कोंडागांव से लता उसेंडी के नामों की चर्चाएं हो रही हैं। सियासी पंडितों का कहना है कि इन छह में किन्हीं दो पर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व मुहर लगा सकता है।






