Chhattisgarh News: CG कांग्रेस में भगदड़: बघेल के करीबी महामंत्री ने दिया इस्‍तीफा, पूर्व विधायक व ओबीसी विभाग के पूर्व अध्‍यक्ष हुए बीजेपी में शामिल

Chhattisgarh News: CG कांग्रेस में भगदड़: बघेल के करीबी महामंत्री ने दिया इस्‍तीफा, पूर्व विधायक व ओबीसी विभाग के पूर्व अध्‍यक्ष हुए बीजेपी में शामिल

Chhattisgarh News: रायपुर। कांग्रेस महामंत्री चंद्रशेखर शुक्‍ला ने पार्टी ने इस्‍तीफा दे दिया है।पीसीसी अध्‍यक्ष दीपक बैज को भेजे अपने इस्‍तीफा में उन्‍होंने पार्टी पर विचारधारा से हटने और तुष्टिकरण की दिशा में बढ़ने का आरोप लगाया है। साथ ही पार्टी में पर अपनी उपेक्षा और अपमान का भी आरोप लगाया है। शुक्‍ला को पूर्व सीएम भूपेश बघेल का करीबी माना जाता है।

कांग्रेस से इस्‍तीफा देने के बाद शुक्‍ला आगे क्‍या करेंगे यह अभी स्‍पष्‍ट नहीं हुआ है, लेकिन आज ही पार्टी के एक पूर्व विधायक चुन्‍नीलाल साहू और वरिष्‍ठ नेता डॉ. चोलेश्‍वर चंद्राकर ने कांग्रेस से इस्‍तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। साहू अकलतरा सीट से विधायक रहे हैं, जबकि चंद्राकर पार्टी के ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्‍यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अजय बंसल ने भी इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार अभी कई नेता पार्टी छोड़ने की कतार में खड़े हैं। बताते चले कि शुक्‍ला की गिनती बड़े किसान नेताओं में होती है।

विधानसभा चुनाव के बाद अपने लेटर को लेकर चर्चा में आए थे शुक्‍ला

आज पार्टी छोड़ने वाले कांग्रेस के महामंत्री शुक्‍ला ने विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद पार्टी की तत्‍कालीन प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा और प्रदेश अध्‍यक्ष दीपक बैज को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्‍होंने जमकर अपनी भड़ास निकाली थी। पत्र में शुक्‍ला ने लिखा है- आसन्न चुनाव में विपरीत परिणाम आने से सभी कांग्रेस जन दुखी एवं विचलित हैं, इस हार के लिए जो प्रत्यक्ष तौर पर जवाबदार थे उनकी बैठक (लीपा-पोती) आप लोगों ने दिल्ली में कर ली। नेता प्रतिपक्ष के चयन की औपचारिकता भी आप लोगों ने कर लिया, किन्तु 75 पार की बातें करते-करते हम 35 में क्यों सिमट गए, इसकी समीक्षा आज 15 दिनों बाद भी करने की आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है।

1. हमारी योजनाएं और प्लानिंग क्यों धरासी हुई ?

2. हमारे सर्वे जो 7-7 बार हुआ, वह क्यों असफल हुआ ?

3. नेताओं को क्षेत्र बदलकर, (महंत राम सुन्दर दास जी एवं छाया वर्मा जी) क्यों चुनाव लड़वाया गया ?

4. ब्लॉक एवं जिला कांग्रेस कमेटी से आये नामों पर, क्यों नहीं टिकिट बाटा गया ?

दुख के साथ लिखना पड़ रहा है कि दिल्ली के नेताओं का छत्तीसगढ़ राजनीतिक पर्यटन हब, मौज-मस्ती का केन्द्र बन गया है। एक-एक प्रकोष्ठ में 4-4 प्रदेश अध्यक्ष बनाये गये। L.D.M. रूपी के तमाशा किया गया। पैसे लेकर नियुक्तियां की गईं। जिस जोगी कांग्रेस को बामुश्किल हमनें संघर्ष कर बहार किया था उन्हें बुला-बुला कर उपकृत कर, राजनीतिक और शासकीय पदों से सम्मानित किया गया।

पराजय और संघर्ष हम कांग्रेसीयों के लिये नया नहीं है, हम कांग्रेसजन रात-दिन मेहनत कर, खून पसीना, जलाकर (खासकर हमारे किसान कांग्रेस की अति महत्वपूर्ण भूमिका थी 2018 में) अपने ऊपर शासकीय धाराएं लगवाकर, सरकार बनाते हैं और हमारे आदरणीय माननीय अपने नीहित स्वार्थों में लड़-झगड़ कर सत्ता गंवातें हैं। इसके लिये कोई एक नहीं, सारे मंत्री जिम्मेदार हैं, जो हवा में उड़ रहे थे, और पूरे 5 साल, पूरे तन-मन से कार्यकर्ताओं का अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।

हमारी सिर्फ राजीव गांधी कृषि न्याय योजना अत्यंत असरकारी एवं लाभकारी थी, इसके अलावा गोठान, नरवा-गरवा-घुरवा-बाडी और राजीव युवा मितान, हाल बेहाल था तथा धरातल में साकार नहीं था। हम कलेक्टरों एवं शासकीय मिशनरियों के कार्यक्रमों में आयी भीड़ को देखकर सदैव गदगद रहते थे और समझ ही नहीं पा रहे थे कि प्रायोजित है।

इन सभी पर व्यपाक विस्तार से चर्चा होनी चाहिये। चर्चाएं और भी बहुत हैं और शिकायतें भी। यदि इन परिस्थितियों का हम सामना नहीं करेंगे तो हमारी स्थिति बद से बदत्तर होती जायेगी। सामनें लोकसभा चुनाव है, विधानसभा चुनाव शुद्ध रूप से हमारे प्रदेश के नेताओं की गलतियों की वजह से हारे हैं। पूरे पांच साल संगठन और सरकार में समन्वय नहीं रहा और जिन दलालों को हटाने का सपना लिये स्व. राजीव गाँधी जी चले गये, उन्हीं दलालों और वामपंथियों ने पार्टी में कब्जा कर लिया है। जिसका दुष्परिणाम हम सभी झेल रहे हैं।

आपसे निवेदन है जितने को भी नोटिस दिया गया है अथवा कार्यवाही की गई है, सभी को तत्काल निरस्त कर, सभी प्रकरणों को अनुशासन समिति में भेजें। तथा शीघ्रतिशीघ्र पार्टी की विस्तारित बैठक बुलाकर हार के कारणों की समीक्षा करें, तथा सुनिश्चित करें कि नविष्य में इस प्रकार की घटनाएँ न हो और भविष्य की रणनीति बनायें।कल हम सबके परम आदरणीय महंत राम सुन्दर दास जी ने व्यथीत होकर इस्तीफा दे दिया। इसके पूर्व सीतापुर सरगुजा के हमारे एक कार्यकर्ता भाई सुरेश अग्रवाल ने आत्महत्या कर लिया। भरे चुनाव में अम्बालिका साहू और तुलसी साहू, जैसे सशक्त नेत्रीयों का पार्टी छोड़ना, हम इन सब चीजों को समझ ही नहीं पा रहे थे।

अभी भी सालों से कांग्रेस के समर्पित निष्ठावान चार दर्जन से अधिक नेताओं को बिना कोई तथ्यात्मक प्रमाण के कारण बताओं नोटिस पकड़ा दिया गया। समन्वय और सामंजस जैसी शब्दों से पूरी तरह दरकिनार कर कार्यवाहियों की गई। चुनाव के दौरान बनाई गई समितियों ड्राइंग रूम के शोपीस बनकर रह गई। 2-2 पूर्व विधायकों को निष्कासित कर दिया गया। एक पूर्व मंत्री को भी नोटिस पकड़ा दिया। पार्टी में अनुशासन के नाम पर आंतरिक लोकतंत्र को दबाया, कुचला जा रहा है। जिसकी वजह से लोग दिल्ली से लेकर चौराहों तक आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

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