Chhattisgarh Budget: बजट खर्च में अब विभागों की मनमानी नहीं, वित्त सचिव ने वित्तीय निरंकुशता पर कसा शिकंजा, करप्शन पर लगेगा अंकुश…

Chhattisgarh Budget: बजट खर्च में अब विभागों की मनमानी नहीं, वित्त सचिव ने वित्तीय निरंकुशता पर कसा शिकंजा, करप्शन पर लगेगा अंकुश…

Chhattisgarh Budget: रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब विभागों की मनमानी नहीं चलेगी। पिछले वित्तीय वर्ष में वित्त विभाग को कई मंत्रियों को पत्र लिख आग्रह करना पड़ा था कि पैसे खर्च किए जाए। वित्त विभाग ने विभागों के सचिवों से कहा था कि सप्लायरों, ठेकेदारों का पेमेंट लटकाने से करप्शन की गुंजाइश बढ़ती है। अगर पार्टी को टाईम पर पेमेंट मिलता रहे तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है। साथ ही क्वालिटी वर्क होता है।

इस पर वित्त सचिव ने पहले से ही विभाग प्रमुखों को चेता दिया है। उन्होंने कहा है कि अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागों के व्यय पर वित्त विभाग की निगरानी रहेगी।

वित्त सचिव मुकेश बंसल ने विभागों से कहा है कि वित्तीय वर्ष में बजट के समुचित उपयोग के लिए विभागों द्वारा कार्ययोजना तैयार की जाए तथा वर्ष के दौरान व्यय इस प्रकार नियंत्रित किया जाए कि अंतिम तिमाही में व्यय का आधिक्य न हो। इस उद्देश्य से वित्तीय वर्ष में व्यय की सीमा निम्नानुसार निर्धारित की गई है-

1. विभागों को वित्तीय वर्ष की प्रथम छमाही में कुल बजट प्रावधान का 40 प्रतिशत व्यय करना होगा, जिसमें से प्रथम तिमाही में 25 प्रतिशत तथा द्वितीय तिमाही में 15 प्रतिशत व्यय शामिल होगा।

2. द्वितीय छमाही में कुल बजट प्रावधान का 60 प्रतिशत व्यय किया जाएगा, जिसमें से तृत्तीय तिमाही में 25 प्रतिशत एवं चतुर्थ तिमाही में 35 प्रतिशत व्यय शामिल होगा।

3. बजट आबंटन की सर्वर में प्रविष्टि 2 किश्तों में अर्थात प्रथम छःमाही तथा द्वितीय छःमाही के लिए ही की जाएगी, न कि प्रत्येक तिमाही के लिए। व्यय की सीमा तिमाही के लिए ही होगी एवं व्यय की मॉनीटरिंग वित्त विभाग द्वारा तिमाही आधार पर की जाएगी।

4. वित्तीय वर्ष के अंतिम माह अर्थात मार्च में व्यय की अधिकतम सीमा कुल बजट प्रावधान का 15 प्रतिशत तक होगी।

5. प्रथम छमाही में निर्धारित सीमा से कम व्यय करने की स्थिति में बचत राशि का 50 प्रतिशत, तृतीय तिमाही में व्यय के लिए अग्रेषित (बंततल वितूंतक) की जा सकेगी जिसका उपयोग तृत्तीय तिमाही में करना अनिवार्य होगा। इसके लिए विभागों को निर्धारित सीमा से कम व्यय का औचित्य स्पष्ट करते हुए वित्त विभाग से सहमति प्राप्त करनी होगी। बचत की शेष 50 प्रतिशत राशि आवश्यकता के आधार पर अन्य विभागों को आबंटित की जाएगी।

6. यह देखने में आया है कि कतिपय विभागों द्वारा मार्च के अंतिम सप्ताह में योजनाओं का पूर्ण आबंटन जारी किया गया है जो कि उपरोक्तानुसार निर्देशों के अनुकूल नहीं है। विभाग तिमाही आधार पर निर्धारित व्यय सीमा का कड़ाई से पालन करते हुए यह सुनिश्चित करें कि सभी निरंतर योजनाओं में बजट आबंटन प्रति त्रैमास हेतु निर्धारित सीमा के अनुसार जारी किया जाए। किसी भी स्थिति में वित्त वर्ष की अंतिम माह में किसी भी योजना का आबंटन बिना वित्त विभाग के सहमति के जारी अथवा आहरण नहीं किया जाए।

7. स्थापना अनुदान एवं अशासकीय संस्थाओं को अनुदान अंतर्गत प्रथम छमाही के लिए 40 प्रतिशत एवं द्वितीय छमाही के लिए 60 प्रतिशत व्यय सीमा निर्धारित की जाती है। प्रथम छमाही में निर्धारित सीमा से कम व्यय करने की स्थिति में बचत राशि का 50 प्रतिशत तृतीय तिमाही में व्यय के लिए अग्रेषित की जा सकेगी। जिसका उपयोग तृतीय तिमाही में करना अनिवार्य होगा।

पढ़िये वित्त सचिव का विभाग प्रमुखों को भेजा गया सर्कुलर…


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