CG Teachers Sanction: 5 साल नौकरी के बाद भी नहीं हो रहा संविलियन, शेष बचे शिक्षकों के संविलियन के लिए शासन ने नहीं बनाया है कोई प्रावधान !

CG Teachers Sanction: 5 साल नौकरी के बाद भी नहीं हो रहा संविलियन, शेष बचे शिक्षकों के संविलियन के लिए शासन ने नहीं बनाया है कोई प्रावधान !

CG Teachers Sanction रायपुर। यूं तो कहने के लिए प्रदेश में शिक्षाकर्मी पद्धति समाप्त हो चुकी है लेकिन वास्तविकता में आज भी 200 से अधिक ऐसे शिक्षाकर्मी है जिनका संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में नहीं हुआ है और वह पंचायत और नगरीय निकाय में ही रहकर अपनी सेवाएं देने को मजबूर है।

दरअसल जब स्कूल शिक्षा विभाग में अंतिम संविलियन हुआ तब जारी हुए आदेश में 16278 की संख्या बताते हुए 2 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षकों का संविलियन किया गया। उस समय कई शिक्षक ऐसे थे जिन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी हासिल की थी और जिनका 2 साल पूरा नहीं हुआ था साथ ही कुछ शिक्षक विभिन्न मामलों में निलंबित चल रहे थे जिनकी बाद में बहाली हुई ऐसे अलग-अलग प्रकरण के जो शिक्षक 1 नवंबर 2020 को संविलियन से चूक गए उनका आज तक स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन नहीं हुआ है। शिक्षकों के संविलियन की लड़ाई लड़ने वाले सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक इस मुद्दे को लेकर कई बार अधिकारियों से चर्चा कर चुके हैं बावजूद इसके इस मामले में अधिकारी शासन से निर्देश न होने की बात करके हाथ खड़ा कर दे रहे है।

ऐसे ही एक मामले में संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग रायपुर से जारी पत्र को सार्वजनिक करते हुए विवेक दुबे ने बताया कि महिला शिक्षिका के स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए उनके कार्यालय से प्रस्ताव जेडी कार्यालय भेजा गया था जिसमें जेडी कार्यालय ने स्पष्ट रूप से लिखकर भेज दिया है की 1 नवंबर 2020 को सविलियन होने के बाद शेष बचे शिक्षकों के संविलियन के संबंध में शासन का कोई निर्देश न होने के कारण सविलियन किया जाना संभव नहीं है।

शासन को इस पर लेना चाहिए निर्णय-विवेक दुबे

शासन को इस गंभीर विषय पर ध्यान देते हुए प्रशासन को बचे हुए शिक्षकों के सविलियन के लिए निर्देशित करना चाहिए। हम स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन के माध्यम से कई बार अवगत करा चुके हैं और विधानसभा की जानकारी के माध्यम से भी यह बात सार्वजनिक हो चुकी है की प्रदेश में 200 से भी अधिक शिक्षक अभी भी अपने संविलियन की राह देख रहे हैं । यह आश्चर्यजनक विषय है कि शासन का इस ओर ध्यान ही नहीं है ।

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