CG News: नौकरी से दिलचस्प त्यागपत्रः नौकर बनकर काम नहीं कर सकता, मालिक माइंडसेट से जीने के लिए हेड मास्टर ने दिया इस्तीफा, पढ़िये और क्या लिखा…

CG News: नौकरी से दिलचस्प त्यागपत्रः नौकर बनकर काम नहीं कर सकता, मालिक माइंडसेट से जीने के लिए हेड मास्टर ने दिया इस्तीफा, पढ़िये और क्या लिखा…

बिलासपुर। विकास खंड लोरमी के शासकीय प्राथमिक शाला परसवारा के प्रधान पाठक ज्ञान सिंह ध्रुव ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी लोरमी को भेजे इस्तीफे में जो कारण बताया है वह कम राेचक नहीं है। बीईओ को भेजे इस्तीफे के संबंध में जब एनपीजी ने हेडमास्टर धु्रव से इस संबंध में बात की तो उन्होंने इस्तीफे के कारणों का ना केवल खुलासा किया वरन यह भी कहा कि माइंडसेट मेरा वैसा ही है। शिक्षक रहते हुए मैं अपने परिवार के सदस्यों का भला नहीं कर पाया। माइंडसेट है, इस्तीफा मैंने इसलिए दिया है। आगे मालिक की तरह जीना चाहता हूं।

0 स्कूल को बताया चिड़ियाघर, हालात से दिखा नाराज

हेड मास्टर ध्रुव ने स्कूल को चिड़ियाघर बताते हुए लिखा है कि चिड़ियाघर में रहकर ना तो मैंने अपनी जिंदगी बदल पाया और ना ही अपने परिवार के सदस्यों का। नौकरी करते-करते नौकर बनकर रह गया हूं। माइंडसेट कर लिया हूं कि अब नौकर नहीं मालिक बनकर जीना है।

0 कुछ इस अंदाज में लिखा और सौंप दिया इस्तीफा

हेड मास्टर ने बीईओ को भेजे त्यागपत्र में कुछ इस तरह लिखा है। वे लिखते हैं कि उक्त विषयांतर्गत लेख है कि मैं ज्ञानसिंह ध्रुव, प्रधान पाठक के पद पर शासकीय प्राथमिक शाला परसवारा विकास खण्ड लोरमी में पदस्थ हूं। मैं वर्ष 2005 से शासकीय शिक्षक के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन किया हूं। 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के पश्चात भी मेरे एवं मेरे परिवार की स्थिति में कुछ खास परिवर्तन नहीं आया है, क्योंकि शासकीय नौकरी का मतलब हमारा मालिक कोई और है। मैं आगे का जीवन नौकर Mindset के साथ नही जी सकता। इस कारण से पूरे होसों हवास में मालिक Mindset से जीने हेतु अपनी स्वेच्छा से त्याग पत्र दे रहा है। क्योंकि मैं चिड़ियाघर में रहकर अपना और अपने लोगों का जिंदगी नही बदल सकता। अतः आपसे निवेदन है कि मेरा त्याग पत्र स्वीकृत करने की कृपा करें।

0 हां, मैंने माइंडसेट कर लिया है

एनपीजी ने जब हेड मास्टर ध्रुव से उनके इस्तीफे और बीईओ को लिखे कारण के संबंध में पूछा तब उन्होंने दोटूक कहा, सब-कुछ पूरे होश से लिखा है। चिड़ियाघर में रहते नौकर का आभास हो रहा था। मालिक माइंडसेट से अब जीना चाहता हूं। बस अब बहुत हो गया। नीचे पढ़ें लेटर…

 

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