CG Medical College: एक टेंडर, बड़ा खेलाः CM हाउस, मंत्रियों के बंगले जैसा टेंडर का साइज बड़ा करके 4 मेडिकल कॉलेजों में CGMC द्वारा गोलमाल की तैयारी!
CG Medical College: रायपुर। छत्तीसगढ़ में चार नए मेडिकल कॉलेज बनाए जाने हैं। इनमें दंतेवाड़ा का गीदम, कवर्धा, मनेंद्रगढ़ और जांजगीर शामिल हैं। इसके लिए भारत सरकार ने अपने हिस्से का 1206 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिया है।
सप्लाई और खरीदी में बड़ा कांड करने वाला सीजीएमएससी इन चारों मेडिकल कॉलेजों को बनवा रहा है। सीजीएमएससी ने पिछले कुछ सालों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाए हैं, उसके हालत इतने खराब है कि साल दो साल में प्लास्टर टूट कर गिर रहा है तो नल की टोंटी और बिजली कनेक्शन फेल हो रहे हैं। जिलों के सीएमओ को प्रेशर डाल हैंड ओवर कराया गया। प्रेशर इसलिए कि बेहद खराब निर्माण की वजह से सीएमओ उसे लेने के लिए तैयार नहीं थे।
चार मेडिकल कालेज, एक टेंडर
सीजीएमएसी ने छत्तीसगढ़ के चार कोनों पर स्थित चार मेडिकल कालेजों के लिए एक टेंडर किया है। चूकि हजार करोड़ से अधिक का टेंंडर है, इसलिए मात्र दो ही कंपनियां टेक्निकल बीड में क्वालिफाई हुई है।
फायनेंसिल बीड ओपन करने के लिए 6 जनवरी से लेकर सीजीएमएससी टेंडर कमेटी की पांच बैठक बुला चुका है। मगर फंसने की वजह से कई मेम्बर बैठक में आ नहीं रहे और कोरम के अभाव में बार-बार बैठक स्थगित हो जा रही।
कल 3 फरवरी की बैठक में सीजीएमएससी के अधिकारियों ने मेम्बरों को यहां तक कह दिया कि आपलोग ऑनलाइन जुड़ जाएं, मगर लोग इसके लिए भी तैयार नहीं हुए।
एक टेंडर प्रैक्टिकल नहीं
जानकारों का कहना है कि चारों साइट अगर आसपास होता तो बड़ी कंपनियां उसके लिए सेटअप लगाती लेकिन चार अलग-अलग साइट पर 300 करोड़ के काम के लिए बड़ी कंपनियां कतई अपना सेटअप नहीं लगाएगी।
ऐसे में, यही होगा कि टेंडर लेने के बाद छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों को सबलेट कर देगी। इससे नुकसान खजाने का ही होगा। अगर अलग-अलग टेंडर होता तो छोटी कंपनियां भी हिस्सा लेती। इससे टेंडर का रेट बिलो जाता।
सीएम हाउस, मंत्रियों के बंगले
नया रायपुर में सीएम हाउस और मंत्रियों के बंगले बनाने के लिए पीडब्लूडी ने इसी तरह सभी कामों को क्लब कर दिया था। बताते हैं कि छोटे टेंडर में कंपीटिशन बढ़ जाता है, सीएम हाउस, मंत्रियों के सभी बंगलों आदि को मिलाकर 600 करोड़ का टेंडर कर दिया गया।
छत्तीसगढ़ में क्या सेंट्रल इंडिया में 600 करोड़ का भवन बनाने वाला कोई ठेकेदार है नहीं। लिहाजा, दिल्ली की कंपनी को काम मिला और रायगढ़ के ठेकेदार को सबलेट हो गया। हो सकता था कि अलग-अलग टेंडर करने पर रेट बिलो जाता और उससे सरकार का पैसा बचता।
सीजीएमएससी की बेचैनी और बड़ा सवाल
सीजीएमएससी के घोटालों की जब एसीबी जांच चल रही है, आधा दर्जन अधिकारियों को कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है, ऐसे में सवाल उठता है कि चार मेडिकल कॉलेज के टेंडर के लिए सीजीएमएससी इतना बेचैन क्यों है? एक तो उसने डॉक्टरों को टेंडर कमेटी का सदस्य बना दिया। उपर से टेंडर कमेटी की मीटिंग में शामिल होने के लिए हलाकान कर रहा है। टेंडर कमेटी का मिनिटस डॉक्टरों के कवर्धा और जगदलपुर स्थित घरों में भेज दिया गया कि आप दस्तखत कीजिए। जब मीटिंग में आए नहीं, तो डॉक्टर कैसे दस्तखत करेंगे? इसके बाद एक के बाद एक टेंडर कमेटी की पांच मीटिंग बुलाई जा चुकी है। पांचों में कोरम पूरा नहीं हो पा रहा। क्योंकि मेम्बरों को लग रहा कि बाद में कहीं कोई जांच हो गई तो वे फंस जाएंगे।