Bilaspur High Court: कर्मचारी से रिकवरी अन्याय: हाई कोर्ट ने वसूली गई राशि 8 फीसदी ब्याज के साथ कर्मचारी को लौटाने दिया आदेश

Bilaspur High Court: कर्मचारी से रिकवरी अन्याय: हाई कोर्ट ने वसूली गई राशि 8 फीसदी ब्याज के साथ कर्मचारी को लौटाने दिया आदेश

Bilaspur High Court: बिलासपुर: जल संसाधन विभाग में बाबूगीरी का अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। 19 साल पहले अपने एक कर्मचारी को एक लाख 94 हजार 819 रुपए अधिक वेतन का भुगतान कर दिया था। जब वह सेवानिवृत हुआ तब विभाग ने रिकवरी आदेश जारी कर दिया और राशि की वसूली कर ली। सेवानिवृत कर्मचारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने वसूली गई राशि आठ फीसदी ब्याज के साथ याचिकाकर्ता को वापस लौटाने का निर्देश दिया है। इसके लिए 45 दिन की माेहलत दी है।

याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वसूली आदेश को याचिकाकर्ता कर्मचारी के प्रति विभाग का अन्यायपूर्ण कार्रवाई माना है। इस टिप्पणी के साथ रिकवरी आदेश को रद कर दिया है। याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह बघेल ने अपनी याचिका में जानकारी दी है कि वह जल संसाधन विभाग में अधीक्षक के पद में कार्यरत था। 31 दिसम्बर 2017 को उनकी सेवानिवृति हुई। सेवानिवृत्त होने के बाद जल संसाधन विभाग ने 12 अप्रैल 2018 को सेवाकाल के दौरान गलती से एक लाख 94 हजार 819 रुपए अधिक वेतन भुगतान करने की जानकारी देते हुए वसूली आदेश जारी किया। रिकवरीआदेश जारी करने के साथ ही सेवानिवृति देयक से उक्त राशि काट ली।

विभाग की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने वसूली आदेश को रद करने, अंतिम वेतन के अनुसार पेंशन निर्धारण, ग्रेच्युटी के साथ ही अवकाश नगदीकरण राशि दिलाने की मांग की। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अलावा राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए विधि अधिकारी ने बताया कि याचिकाकर्ता को वर्ष 1997 में संशोधित वेतनमान दिया गया।

विभाग को इस गलती की जानकारी 19 वर्ष बाद हुई। फाइलों से जानकारी मिलने के बाद वर्ष 2016 में याचिकाकर्ता को नोटिस जारी की गई थी। नोटिस का उसने जवाब पेश कर दिया था। 31 दिसम्बर 2017 को सेवानिवृत्त हो गए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा ऐसे मामले में कर्मचारियों से वसूली की जाती है तो यह अन्यायपूर्ण व कठोर आदेश होगा।

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