Bilaspur High Court: ..तो नेशनल हाईवे पर बैठ कर काम करूंगा, कुछ हुआ तो…: कर्मचरी नेता ने चीफ जस्टिस, रजिस्ट्रार जनरल और एसपी को लिखा पत्र, जानिये क्‍या है मामला

Bilaspur High Court: ..तो नेशनल हाईवे पर बैठ कर काम करूंगा, कुछ हुआ तो…: कर्मचरी नेता ने चीफ जस्टिस, रजिस्ट्रार जनरल और एसपी को लिखा पत्र, जानिये क्‍या है मामला

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट अधिकारी कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद पाठक की एक चिट्टी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सहित प्रशासनिक हलके में हलचल मचा दी है। अधिकारी व कर्मचारियों के हित में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व रजिस्ट्रार जनरल बीपी वर्मा को पत्र लिखकर 20 सूत्रीय मांगों का पुलिंदा थमा दिया है। जब तक उनकी मांग पर विचार नहीं किया जाता वे हाई कोर्ट मुख्य भवन के सामने गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर कामकाज करने का ऐलान कर दिया है। यहां बैठने से रोकने पर एनएच पर बैठकर कामकाज करने की बात कही है।

सीजे औ रजिस्ट्रार जनरल को लिखे पत्र में कहा है कि उच्च न्यायालय कर्मचारी संघ का अध्यक्ष होने के नाते कर्मचारी हित एवं अन्य विषयों के संबंध में समय-समय पर पत्र व्यवहार किये जाने हेतु बाध्य है, जिस कारण प्रशासन द्वारा मेरे प्रति रोष व्याप्त है। और मेरे द्वारा चतुर्थ श्रेणी/तृतीय श्रेणी कर्मचारी एवं द्वितीय श्रेणी अधिकारी के हित में दिये गए किसी भी आवेदन पर रजिस्ट्री प्रशासन द्वारा गंभीरता से विचार नहीं किया जाता है। जिस कारण उन्हें आर्थिक व मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। इन सब कारणों से मैं आज दिनांक 20.08.2024 से गृह त्याग कर कार्यालय में ही निरंतर रहकर अपने कार्य का संपादन शांति पूर्वक करुंगा। जब तक प्रार्थी द्वारा दिये गए कर्मचारी हित व स्वयं के अभ्यावेदनों में उचित न्याय न मिल जाए, जिसकी सूचना पूर्व में भी दी जा चूकी है।

इन मांगो को लेकर उठाया सख्त कदम

. जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उच्च न्यायालय छग के अधिकारियों/कर्मचारियों को देय वेतनमान देने की अनुशंसा के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उसे राज्य शासन को भेजे गये लगभग 14 माह हो गये है, जिस पर अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है। इसे अनंत काल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।

. उच्च न्यायालय के अधिकारीयों/कर्मचारियों हेतु सस्ते दर पर आवासीय भूमि आबंटन किये जाने के संबंध में आवेदन दिये लगभग 05 वर्ष से अधिक हो गया है। आज निर्णय नहीं लिया गया है।

. उच्च न्यायालय में कार्यरत् समस्त अधिकारीयों/कर्मचारियों हेतु कैसलेस चिकित्सकीय उपचार की सुविधा का लाभ दिये जाने से संबंधित आवेदन आज भी लंबित है।

. उच्च न्यायालय के शाखाओं में चतुर्थ श्रेणी/तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की नितांत कमी है। इस ओर कई बार ध्यान आकृष्ट किया गया किन्तु समस्या जस का तस है। इस वर्ग में अधिक संख्या में नियमित भर्ती की आवश्यकता हैं।

. न्यायालय में कार्यरत् वाहन चालक की ड्यूटी अवधि 08 घंटे किये जाने की आवश्यकता है, ताकि वे अपने परिवार को भी समय दे सकें। इस समस्या के समाधान हेतु वाहन चालकों की अधिक संख्या में भर्ती कर उनका ड्यूटी अवर निर्धारित किया जा सकें।

. संघ द्वारा दिये गये विभिन्न आवेदनों को बिना किसी के कारण नस्तीबद्ध कर दिया जाता है। किस कारण से आवेदन को निरस्त किया जाता है उसका स्पष्ट लेखा किया जाना चाहिये।

. व्यवस्था के नाम पर किसी का 20 वर्षों में एक भी स्थानांतरण न करना वहीं दूसरी ओर व्यवस्था के नाम पर 20 वर्षों में 20 बार स्थानांतरण करना यह इस लिये हो रहा है कि कही कोई स्थानांतरण पालिसी नहीं है। संघ द्वारा इस संबंध में अनेकों आवेदन दिया गया है पर आज दिनांक तक स्थानांतरण पालिसी नहीं बनी है।

. न्यायालय में कार्यरत समस्त अधिकारी/कर्मचारियों एवं बाहर से आने वालो के लिये मंत्रालय की तर्ज पर सस्ते दर पर भोजन / नास्ते की सुविधा स्वच्छ व साफ वातावरण में उपलब्ध कराया जायें।

. न्यायालय में कार्यरत् अधिकारियों/कर्मचारियों के लिये परिवहन की कोई सुविधा नहीं है जैसा की ज्ञात हुआ था कि पुराने से नये उच्च न्यायाल भवन में सिफ्ट होने पर दूरी को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा 04 स्टाफ बस की अनुशंसा की गई थी किन परिस्थतियों में इस पर अमल नहीं हो पाया आज भी अज्ञात है। अतः 04 स्टाफ बस चलायें जाने की आवश्यकता है। ताकि समय पर सभी अधिकारी/कर्मचारी सुरक्षित तरीके से अपने कर्तव्य पर पहुंच सकें, मंत्रालय में ये सुविधा वहां पर कार्यरत् सभी के लिये उपलब्ध हैं।

. अधिकारी/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति पर होने वाले कार्यक्रम को रजिस्ट्री द्वारा करने हेतु फंड की व्यवस्था की जायें जिससे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति दी सकें। इस संबंध में संघ द्वारा दिया गया आवेदन आज भी लंबित रखा गया है। आवेदन दिये लगभग 2-3 वर्ष हो गये।

.अधिकारी / कर्मचारियों की सेवानिवृत्त के अगले दिन ही प्रमोशन के हकदार को प्रमोशन का पत्र मिल जाना चाहिये रजिस्ट्री द्वारा ऐसी व्यवस्था को अपनाया जायें/अथवा किन्ही कारणों से नहीं होने पर पद रिक्त दिनांक से समस्त आर्थिक लाभ को प्राप्त करने का अधिकार है।

.प्रमोशन के पद नये सृजित पद को 30 दिन से अधिक लंबित न रखा जायें एवं समस्त आर्थिक देयक का भुगतान पद रिक्त दिनांक एवं पद सृजित दिनांक से देय हो ऐसी व्यवस्था की जायें।

. केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना हेतु संघ द्वारा आवेदन दिया गया था, आवेदन समस्त अधिकारीयों / कर्मचारियों/ अधिवक्ता के बच्चें व स्थानीय बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए दिया गया था। जिस पर कार्यवाही न कर समस्त बच्चों के हित प्रभावित हुए है। यह समझ से परे है कि आवेदन पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई।

. उच्च न्यायालय से आये दिन दो पहिया वाहन की चोरी होती रहती है। जबकि उच्च न्यायालय परिसर सबसे सुरक्षित माना जाता है वहाँ से निरंतर चोरी होना समझ से परे है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगता है। जबकि परिसर में जगह-जगह पर कैमरा लगा है। सभी गेटों पर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

.निर्धारित अवधि से अधिक ड्यूटी लिये जाने पर ओवर टाईम दिया जायें जैसा की माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपना विचार रखा गया था।

. वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन में न्यायिक शाखा में कार्यरत कर्मचारियों का ग्रेड़िग जानबूझकर आशयपूर्वक व भेदभाव पूर्ण तरीके से ग्रेड को डी ग्रेड किया जाता है। यह कार्य कर्म करने वाले अधिकारीयों / कर्मचारियों को हतोत्साहित करता है।

. संघ के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों का समय बे समय पर स्थानांतरण किया जाता है। साथ ही संघ के अध्यक्ष को अधिकारीयों / कर्मचारियों के हित में विभिन्न मांगों के लिये रजिस्ट्री को पत्राचार करते रहते है, जिस कारण उन्हें नोटिस पर नोटिस देकर व विभागीय जाँच का आधार तैयार करते रहते है। जिसका वर्तमान में दिया गया नोटिस है। ताकि वे डरकर अधिकारीयों / कर्मचारियों के हित में काम न कर सकें।

. न्यायालय परिसर में अधिकारीयों / कर्मचारियों हेतु एक भी वाहन स्टैण्ड नहीं है सारे वाहन स्टैण्ड केवल अधिवक्ताओं हेतु सुरक्षित रखा गया है, जैसा की वाहन स्टैण्ड बोर्ड में लिखा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि माननीय न्यायालय में मंत्रालयीन कर्मचारी कार्यरत् ही नहीं है। पता नही PWD किस मानसिकता के साथ काम करता है। माननीय न्यायालय में कार्यरत् अधिकारीयों/कर्मचारियों के लिये पृथक से वाहन स्टैण्ड की व्यवस्था हो जैसा की अधिवक्ताओं के लिये किया गया है।

. कार्यालय आते वक्त गेट नंबर-02 एवं 03 में अधिवक्ता एवं अधिकारी / कर्मचारियों का आये दिन दुर्घटनाएँ होते रहते है। दुर्घटना को रोकने हेतु प्रशासन द्वारा गंभीरता पूर्वक पहल नहीं की जा रही है।

. प्रायः यह देखा जाता है कि न्यायिक शाखाओं में कार्यरत् समस्त कर्मचारियों को देर रात तक रूक कर अपने कार्य का संपादन करना पड़ता है, उसका कारण यह है कि श्रीमान रजिस्ट्रार (न्यायिक) महोदय द्वारा अगले दिन केस लगाये जाने का दिशानिर्देश प्रायः संध्या के 05:00 बजे के बाद ही दिया जाता है, जिस कारण महिला/पुरुष कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पडता है।

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