Bilaspur High Court: अधिकारी,कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर- सेवाकाल के दौरान वेतन का किया अधिक भुगतान तो नहीं कर सकेंगे रिकवरी

Bilaspur High Court: अधिकारी,कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर- सेवाकाल के दौरान वेतन का किया अधिक भुगतान तो नहीं कर सकेंगे रिकवरी

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह फैसला प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारियों के लिए राहत देने वाली है। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है कि सेवाकाल के दौरान अगर किसी अधिकारी व कर्मचारी को अधिक वेतान का भुगतान कर दिया गया है तो उसकी वसूली नहीं कर सकेंगे। चाहे अधिकारी व कर्मचारी ने अंडरटेकिंग ही क्यों ना दे दिया हो। एचआर. टोंडर 8वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल राजनांदगांव में पुलिस विभाग में सहायक सेनानी (वर्ग-2) ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के खिलाफ याचिका दायर कर विभाग की कार्रवाई को चुनौती दी थी।

एचआर. टोंडर 8वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल राजनांदगांव में पुलिस विभाग में सहायक सेनानी (वर्ग-2) के पद पर पदस्थ थे। उनकी पदस्थापना के दौरान सेनानी, 8वीं बटालियन, राजनांदगांव द्वारा उनकी सेवा पुस्तिका को जांच हेतु संयुक्त संचालक, कोष लेखा एवं पेंशन कार्यालय भेजा गया। कार्यालय कोष लेखा एवं पेंशन ने सेवाकाल के दौरान अधिक वेतन भुगतान करना पाया। कोष लेखा एवं पेशन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सेनानी 8वीं बटालियन राजनांदगांव द्वारा उसके विरूद्ध 2,27,046/ रुपये का वसूली आदेश जारी कर दिया।

सहायक सेनानी 8वीं बटालियन, राजनांदगांव द्वारा जारी रिकवरी आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ताअभिषेक पाण्डेय एवं पीएस निकिता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टेट ऑफ पंजाब विरूद्ध रफीक मसीह एवं अन्य, थॉमस डेनियल विरूद्ध स्टेट ऑफ केरला के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। अधिवक्ता पांडेय ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच

द्वारा स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़ विरूद्ध लाभाराम ध्रुव के मामले की सुनवाई के बाद दिए गए फैसले का हवाला भी दिया है।

 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया है महत्वपूर्ण फैसला

अधिवक्ता पांडेय ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के उस फैसले की जानकारी दी है जिसमें डिवीजन बेंच ने कहा है कि किसी भी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी के सेवाकाल के दौरान 05 वर्ष पूर्व वेतन निर्धारण में त्रुटि के कारण यदि अधिक वेतन भुगतान किया गया है, तब भी संबंधित अधिकारी व कर्मचारी से अधिक वेतन भुगतान की रिकवरी नहीं की जा सकती।

 सहमति के बाद भी नहीं कर सकते वसूली

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि संबंधित अधिकारी कर्मचारी से दबावपूर्वक या स्वेच्छा से सहमति भी ले ली गई है, तब भी अधिक वेतन भुगतान की बात कहते हुए रिकवरी नहीं कर सकते।

 बगैर जानकारी कर ली रिकवरी

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में इस बात का भी जिक्र किया है कि विभाग ने अधिक वेतन भुगतान की जानकारी देते हुए रिकवरी कर ली है। रिकवरी के दौरान जब पूछा गया तब इस बात की जानकारी दी। याचिका के अनुसार उसे इस तरह की कार्रवाई से पहले ना तो नोटिस दिया गया है और ना ही कारण बताया गया। सहमति भी नहीं ली गई है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस पांडेय ने रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने सेनानी 8वीं बटालियन राजनांदगांव को नोटिस जारी कर छह महीने के भीतर वसूली गई राशि याचिकाकर्ता को लौटाने का निर्देश दिया है।

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