मासूम से दुष्कर्म केस में भिलाई पुलिस पार्टी बन गई! परिजनों ने सांसद से टीसी दिलाने की लगाई गुहार, बोले…बच्ची स्कूल का नाम सुनकर कांप जा रही

मासूम से दुष्कर्म केस में भिलाई पुलिस पार्टी बन गई! परिजनों ने सांसद से टीसी दिलाने की लगाई गुहार, बोले…बच्ची स्कूल का नाम सुनकर कांप जा रही

रायपुर। मुंबई के बदलापुर में स्कूल में दो बच्चियां के साथ दुराचार की घटना की गूंज आज पूरे देश में है। मगर बिल्कुल इसी तरह की घटना भिलाई के एक स्कूल में हुई। पांच साल की मासूम के साथ शौचालय में दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। डॉक्टर ने जांच में इस बात की तस्दीक की, बच्ची के प्रायवेट पार्ट में चोट पहुंची है।

बता दें, भिलाई के एक नामी स्कूल में 5 जुलाई को नर्सरी की बच्ची के साथ उस समय दुष्कर्म की घटना हुई, जब वो वॉशरूम गई थी। स्कूल से जब वह घर पहुंची तो उसके प्रायवेट पार्ट में काफी तकलीफ हो रही थी। बच्ची के परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए। फिजिशयन ने उन्हें सलाह दी कि वे उसे गायनिक के पास ले जाएं। डॉ. ने बच्ची की जांच के बाद प्रिस्क्रिप्शन में लिखा कि उसके प्रायवेट पार्ट से ब्लड आया है, व्हाईट डिस्चार्ज भी मिला है। इसके बाद परिजन स्कूल पहुंचे। पहले प्रिंसिपल ने भरोसा दिया कि वे जांच कराएंगे। मगर बाद में इस तरह की किसी घटना से वे साफ मुकर गए। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने बच्ची को वॉशरुम ले जाने वाली आया को छुट्टी पर भेज दिया। स्कूल के प्रिंसिपल ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि बच्ची के परिजनों की शिकायत पर उन्होंने सीसीटीवी की जांच कराई थी। उसमें कुछ भी नहीं मिला। सवाल उठते हैं कि पास्को जैसी घटना की शिकायत पर प्राचार्य ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की बजाए खुद ही कैसे सीसीटीवी की जांच कर ली।

उधर, भिलाई की पुलिस पास्को एक्ट में कार्रवाई करने की बजाए खुद ही कोर्ट बनकर स्कूल को लगी पाक-साफ बताने। जबकि, पास्को में स्पष्ट प्रावधान है कि बच्ची के साथ दुराचार की घटना नोटिस में आने पर सबसे पहले पुलिस को एफआईआर दर्ज करना चाहिए। भले ही रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जांच कर मामले को खतम कर दिया जाए। मगर भिलाई के केस में पुलिस ने स्कूल को बचाने की सारी सीमाएं लांघ गई। पुलिस का जोर सिर्फ इस बात पर रहा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है। पुलिस ने बकायदा प्रेस नोट जारी कर बताया कि सीसीटीवी की जांच या स्कूल से पूछताछ में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। कानून के जानकारों की राय में पुलिस को सबसे पहले एफआईआर करना चाहिए था। इसके बाद जांच-पड़ताल। मगर स्कूल के पक्ष में पार्टी बनकर खड़ी हो गई, पुलिस सिरे से खारिज करती रही कि ऐसी घटना नहीं हुई है। वकीलों का कहना है कि स्कूल के प्राचार्य की नोटिस में जैसे ही ये घटना आई, उन्हें सबसे पहले पुलिस को सूचित करना चाहिए था। घटना के अगले दिन ही अगर पुलिस स्कूल की सीसीटीवी का फूटेज निकालकर जांच की होती तो साक्ष्य मिल सकते थे।

भिलाई के बड़े स्कूल में अभिभावकों ने प्रदर्शन भी किया। स्कूल परिसर में 500 से अधिक अभिभावक पहुंच गए और बड़ा हंगामा हुआ। लोगों का कहना है कि पहले भी उस स्कूल में इस तरह की घटनाएं हुई हैं, वरना बड़ी संख्या में यूं ही अभिभावक स्कूल नहीं पहुंच गए। दरअसल, मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना हुई है, ये लगभग सिस्टम में बैठे सभी को पता है। मगर किन्हीं दबावों में पीड़िता के परिजन सामने नहीं आना चाहते। परिजनों ने किसी और माध्यम से रिपार्ट दर्ज कराने की कोशिश भी की थी। दुर्ग के एक वकील से वकालतनामा भी बनवा लिया था। मगर बाद में वे पीछे हट गए। पुलिस इसी की आड़ में दुष्कर्म की घटना को खारिज करती आ रही। मगर इस बात के भी प्रमाण है कि पीड़िता के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखी थी। मगर बाद में पूरा पुलिस महकमा स्कूल के बचाव में उतर आया।

पता चला है, पीड़िता के परिजन गृह मंत्री के साथ दुर्ग सांसद से मुलाकात कर चुके हैं। परिजनों ने सांसद को बताया कि उनकी बच्ची स्कूल का यूनिफार्म देखकर कांप जा रही है…कृपया स्कूल से उसकी टीसी दिलवा दिया जाए। क्योंकि, उस स्कूल में अब वे अपनी बच्ची को नहीं पढ़ाएंगे। बताते हैं, गृह मंत्री से भी परिजनों ने टीसी दिलाने की फरियाद की है।

प्राचार्य बोले…ऐसे टीसी नहीं दूंगा

बताते हैं, परिजनों ने प्राचार्य को टीसी देने के लिए आवेदन दिया। उसमें लिखा हुआ था कि स्कूल में बच्ची के साथ हुई घटना के बाद वे टीसी लेना चाहते हैं। मगर प्राचार्य इस बात पर अड़ गए हैं कि पहले स्कूल में हुई घटना की पंक्ति हटाओ, तब टीसी दूंगा।

परिजन पीछे क्यों हट रहे

परिजनों का छत्तीसगढ़ में बड़ा व्यवसाय है। घटना के अगले दिन उन्होंने प्रयास किया कि चुपचाप इसकी जांच हो जाए और दोषी के खिलाफ कार्रवाई हो। इसको लेकर वे दुर्ग के बड़े पुलिस अधिकारी से मिले भी। मगर बाद में उन पर कहीं से ऐसा दबाव आया कि वकील से तैयार वकालतनामा ले लिया। सूत्रों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने स्कूल को बदनामी से बचाने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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