अरपा-भैंसाझार भूमि अधिग्रहण घोटाला, जांच में बड़ा खेला, पुलिस मानने को तैयार नहीं कि इतना बड़ा खेल पटवारी के बस की बात नहीं

अरपा-भैंसाझार भूमि अधिग्रहण घोटाला, जांच में बड़ा खेला, पुलिस मानने को तैयार नहीं कि इतना बड़ा खेल पटवारी के बस की बात नहीं

बिलासपुर। अरपा– भैंसाझार सिंचाई परियोजना में तीन करोड़ 42 लाख रुपए के मुआवजा घोटाले में नियमों को तो ताक पर रखा गया है,साथ ही एक खसरे को चार अलग-अलग रकबे में बताकर शासन को लंबा चूना लगाया गया है। एक खसरे को चार रकबा या इससे ज्यादा संख्या में बांटने और प्रतिवेदन देने का काम पटवारी आसानी के साथ कर सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि भू अर्जन के अपने नियम कायदे हैं। जिस विभाग को जमीन अधिग्रहण करना होता है वह मौका मुआयना करता है, शासन के अलावा उनका अपना खुद का अमला हाेता है। शासकीय के अलावा निजी भूमि जिसका अधिग्रहण करना होता है, पूरा दस्तावेज रहता है। यह कैसे हो सकता है कि एक खसरे का कई हिस्सा टुकड़ा कर दिया जाए तो अधिग्रहण करने वाले व मुआवजा देने वाले विभाग के अफसरों को भनक तक ना लगे। अगर सच में ऐसा हुआ है तो भी यह गंभीर चूक व लापरवाही है। विभागीय अफसरों ने जानबुझकर किया है तो यह संगठित अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करने में जुट गई है। जल्द ही बड़े पैमाने पर किए गए इस फर्जीवाड़े से पर्दा उठेगा।

जांच में यह बात भी समाने आई है कि भू राजस्व संहिता की धारा 19 का प्रकाशन किए बिना ही भूमि अधिग्रहण की जद में आने वाली जमीनों को इसमें गुपचुप तरीके से शामिल कर दिया है। मामले में तत्कालीन एसडीएम,भू अर्जन अधिकारी,नायब तहसीलदार, आरआई की भूमिका की भी जांच को लेकर अब चर्चा छिड़ी हुई है। यह भी सवाल उठ रहा है कि आला अफसरों की भूमिका की जांच के बिना ही फर्जीवाड़े में एफआईआर और कार्यवाही का प्रस्ताव सिर्फ तत्कालीन पटवारी और वर्तमान आरआई के खिलाफ भेजा गया। अब पुलिस मामले में नीचे से ऊपर तक जांच कर सभी आरोपियों की भूमिका तय करने में जुट गई है।

अरपा भैंसाझार परियोजना में मुआवजा वितरण में तत्कालीन हल्का पटवारी नंबर 45 मुकेश साहू ने राजस्व और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से मिलकर शासन को 3 करोड़ 42 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाया है। मुकेश साहू ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भू अर्जन अधिकारी कोटा को भू अर्जन के प्रकरण में एक खसरे की जमीन को चार अलग– अलग रकबा में बांट दिया और चारों रकबा के हिसाब से मुआवजा प्रकरण बना दिया। नए बनाए गए खसरा नंबरों को सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना ही मर्ज कर दिया। गड़बड़ी सामने आने के बाद पटवारी साहू के खिलाफ विभागीय जांच का निर्देश दिया गया था।जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि मुआवजा वितरण में एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए पटवारी ने राजस्व दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर दिया है। इसके चलते राज्य सरकार के खजाने को तीन करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपए का नुकसान पहुंचा है।

0 मनोज अग्रवाल को पहुंचाया फायदा

मुआवजा देयक पत्रक में खसरा नंबर 1/4 रकबा,0.03 एकड़ को सिंचित और दो फसली बता कर अवैध रूप से 37 लाख 37 हजार और खसरा नंबर 1/6 रकबा 0.62 एकड़ में एक करोड़ रुपए मुआवजा भुगतान मनोज अग्रवाल पिता पवन अग्रवाल को किया गया। मामले के संज्ञान में आने पर कलेक्टर अवनीश शरण ने जांच टीम बनाई थी। जांच टीम ने सोमवार को कलेक्टर अवनीश शरण को रिपोर्ट सौंप दी है। आरआई मुकेश साहू द्वारा तीन करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपए की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। पटवारी पर आरोप है कि ग्राम सकरी में खसरा नंबर 1,9,10 में हुए बटांकन को बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के बगैर मर्ज कर भू– नक्शा पोर्टल में मूल नंबर दर्शाया गया।

0 धारा 19 के प्रकाशन के बगैर बदला मुआवजा ले आउट

जिस संबंधित विभाग के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाता है,उस दौरान राजस्व विभाग के अफसरों की टीम के साथ संंबंधिव विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी मौके मुआयना करते हैं। इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी दस्तावेजों के आधार पर बताते हैं कि किस-किस जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। मौका मुआयना और सहमति के बाद राजस्व विभाग द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में धारा 11 का प्रारंभिक प्रकाशन कराया जाता है। दावा आपत्ति मंगाई जाती है। आपत्तियों के निराकरण के बाद धारा 19 के तहत अंतिम संशोधन पत्रक जारी प्रकाशन किया जाता है। भू राजस्व संहिता की धारा 19 में जिन-जिन खसरा नंबर की जमीनों को परियोजना के लिए चिन्हित किया जाता है, उसका अधिग्रहण कर भूमि स्वामियों को मुआवजा दिया जाता है। अरपा– भैंसाझार परियोजना में धारा 19 में जिन खसरों का प्रकाशन नहीं हुआ था,उसका भी कागजों में अवैध ढंग से अधिग्रहण कर मुआवजा प्रदान कर दिया गया।

0 इनकी भूमिका की होगी जांच

एसडीम, भू अर्जन अधिकारी, तहसीलदार,आरआई और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी। पुलिस का मानना है कि इतना बड़ा खेल अकेले पटवारी कैसे खेलेगा?

0 रिकवरी की कार्यवाही पर हाईकोर्ट का स्टे

कलेक्टर के आदेश के बाद अवैध मुआवजा भुगतान की राशि की रिकवरी के लिए मनोज अग्रवाल को नोटिस जारी किया गया था। रिकवरी की कार्रवाई प्रारंभ होते ही मनोज अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने रिकवरी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कलेक्टर ने तखतपुर एसडीएम को पत्र लिखकर महाधिवक्ता कार्यालय से संपर्क करने व रिकवरी की कार्रवाई पर लगी रोक को हटवाने प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्देश दिया है।

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