Ambedkar Jayanti Holiday: छुट्टी की खबर: भारत सरकार ने घोषित किया सार्वजनिक अवकाश, जानिए हर साल क्यों करना पड़ता है ऐलान

Ambedkar Jayanti Holiday: भारत सरकार ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) को एक बार फिर अवकाश घोषित किया है। इसकी अधिसूचना आज (2 अप्रैल 2025) राजपत्र में प्रकाशित की गई। हर साल की तरह इस बार भी अंबेडकर जयंती पर केंद्र और राज्य सरकार के सभी संस्थानों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। हालांकि, यह छुट्टी सरकारी कैलेंडर में स्थायी रूप से शामिल नहीं है और हर साल इसके लिए विशेष आदेश जारी करना पड़ता है। आइए जानते हैं इस अवकाश की घोषणा और इसके इतिहास के बारे में।
अंबेडकर जयंती पर अवकाश का इतिहास
डॉ. बी.आर. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था और उनकी जयंती को देशभर में समानता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद 2015 से इस दिन को नियमित रूप से अवकाश घोषित किया जाने लगा। इससे पहले अंबेडकर जयंती पर छुट्टी नहीं होती थी। हालांकि, इसे अभी तक सरकारी कैलेंडर में स्थायी छुट्टी के रूप में शामिल नहीं किया गया है। हर साल केंद्र सरकार इसके लिए कुछ दिन पहले विशेष आदेश (स्पेशल ऑर्डर) जारी करती है।
- 2021: छुट्टी की घोषणा एक हफ्ते पहले हुई थी, जिसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जोड़ा गया था।
- 2022: 11 अप्रैल को अवकाश का ऐलान किया गया था।
- 2025: इस बार 2 अप्रैल को राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई।
क्यों नहीं है कैलेंडर में शामिल?
अंबेडकर जयंती को लेकर हर साल विशेष आदेश जारी करने की परंपरा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे स्थायी छुट्टी में शामिल न करने के पीछे प्रशासनिक और नीतिगत कारण हो सकते हैं। फिर भी, यह दिन देशभर में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्कूल, कॉलेज, बैंक, और सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ 25 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अवकाश लागू होता है।
इस साल की घोषणा
इस बार भारत सरकार ने 14 अप्रैल 2025 (सोमवार) को अंबेडकर जयंती के लिए अवकाश घोषित किया है। यह फैसला केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (DoPT) द्वारा लिया गया। अधिसूचना के मुताबिक, सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालय और औद्योगिक प्रतिष्ठान इस दिन बंद रहेंगे। यह अवकाश न केवल सरकारी कर्मचारियों, बल्कि आम नागरिकों को भी बाबासाहेब के योगदान को याद करने और सामाजिक समानता पर विचार करने का मौका देता है।