Bilaspur High Court: सहमति से बनाया संबंध, इसलिए हाई कोर्ट ने दिया ऐसा फैसला

Bilaspur High Court: सहमति से बनाया संबंध, इसलिए हाई कोर्ट ने दिया ऐसा फैसला

Bilaspur High Court बिलासपुर। शिक्षक को रेप के आरोप से दोषमुक्त करने के सत्र न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय की फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान पता चला कि सहमति के आधार पर संबंध बनाए जा रहे थे, पर घर वालों के आने से अपनी छवि बचाने के लिए महिला ने अपने प्रेमी शिक्षक को दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसा दिया।

पूरा मामला वर्ष 2012 का है। गरियाबंद जिला निवासी महिला ने शिक्षक के खिलाफ 18 मार्च 2012 को रेप की रिपोर्ट लिखवाई थी। रिपोर्ट के अनुसार 16 मार्च 2012 को वह दोपहर की 2:30 बजे घर में अकेली थी। इसी दौरान आरोपी शिक्षक हस्ताक्षर लेने के बहाने घर में आया और हाथ पड़कर खींचते हुए कमरे के अंदर लेकर गया और जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाएं। शोर मचाने पर महिला की भाभी आई तो शिक्षक उसे धक्का मार कर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गया। महिला की रिपोर्ट पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ धारा 376(1), 450,506(2) के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।

सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान शिक्षक के अधिवक्ता ने बताया कि दोनों के मध्य सहमति से संबंध बने थे। शिक्षक ने दोनों के मध्य बातचीत की कॉल डिटेल भी प्रस्तुत की थी। कॉल डिटेल के अनुसार 7 जनवरी 2011 से मार्च 2012 तक पीड़िता लगातार शिक्षक से मोबाइल पर संपर्क में थी और लंबी-लंबी बातें करती थी। इस दौरान अभियुक्त कई बार उसके घर गया था और उनके बीच संबंध भी बने थे। इससे स्पष्ट हुआ की घटना दिनांक को भी महिला की सहमति से ही संबंध बने थे। तथ्य व प्रमाणों के आधार पर सत्र न्यायालय ने शिक्षक को रेप के आरोप से दोषमुक्त कर दिया था। दोषमुक्ति के खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जानकारी आई कि सत्र न्यायालय ने आरोपी की ओर से प्रस्तुत कॉल डिटेल के आधार पर दोनों में पुरानी जान पहचान होना पाया था। इसके अलावा घटना के दिन भी पीड़िता ने फोन कर आरोपी को बुलाया था। सत्र न्यायालय में इस आधार पर आरोपी को दोष मुक्त किया था।

शिक्षक के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिए जाने पर महिला ने दिनदहाड़े घर में घुसकर जबरन दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। संपूर्ण तथ्य व साक्ष्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने अपनी छवि बचाने के लिए आरोपी को झूठे मामले में फसाया है। साथ ही शिक्षक को दोषमुक्त करने के सत्र न्यायालय के फैसले को पीड़िता द्वारा दी गई चुनौती खारिज कर दी गई।

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