CG Education News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का इम्पैक्ट: बिलासपुर के तीन बाल वैज्ञानिक आज उडेंगे दिल्ली, करेंगे राज्य का प्रतिधिनित्व

CG Education News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का इम्पैक्ट: बिलासपुर के तीन बाल वैज्ञानिक आज उडेंगे दिल्ली, करेंगे राज्य का प्रतिधिनित्व

CG Education News: बिलासपुर। बिलासपुर के सरकारी स्कूल के तीन बाल वैज्ञानिक दिल्ली में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के मुख्य कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। तीनों बाल वैज्ञानिक अपने मेंटर के साथ रायपुर के माना एयरपोर्ट से आज शाम छह बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। दिल्ली में तीन दिनों तक नीति आयोग के विशेष मेहमान रहेंगे।

हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद जो अब स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी विद्यालय हो गया है। यहां संचालित एटीएल (अटल टिंकरिंग लैब) के तीन बाल वैज्ञानिक स्वतंत्रता दिवस समारोह के विशेष मेहमान बनेंगे। नीति आयोग की ओर से इनका चयन किया गया है। स्कूल के एटीएल प्रभारी डा. धनंजय पांडेय आज दिल्ली के लिए रायपुर स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। खास बात ये कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ये तीनों बाल वैज्ञानिक छत्तीसगढ़ का प्रतिधिनित्व करेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के देशभर में लागू होने के बाद बाल वैज्ञानिकों को परेड में विशेष मेहमान के तौर पर शामिल करना छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में संचालित अटल टिंकरिंग लैब देश-विदेश में अलग अलग नवाचारों व बाल वैज्ञानिकों के आविष्कारों के चलते प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। यहां के बाल वैज्ञानिकों ने अटल कृषि मित्र से लेकर जिम से विद्युत उत्पादन, चीता की राख को परिष्कृत कर जैविक खाद बनाने समेत कई आविष्कार किए हैं। अटल कृषि मित्र ने तो पेटेंट भी प्राप्त कर लिया है। नीति आयोग के निर्देश पर इसके व्यवसायिक उपयोग की तैयारी भी डेल इंडिया कंपनी ने प्रारंभ कर दी है। जल्द ही किसानों को अत्याधुनिक खेती के लिए आधुनिक मशीन प्राप्त होगी। आविष्कार अटल कृषि मित्र जैसे महत्वकांक्षी आविष्कार का प्रदर्शन बाल विज्ञानियों ने राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सामने कर चूके हैं। राष्ट्रपति भवन ने बाल वैज्ञानिकों के लिए 25-25 हजार रुपये का पुरस्कार भी जारी किया गया था।

राजधानी का करेंगे भ्रमण

स्वाधीनता दिवस समारोह के पूर्व बाल वैज्ञानिकों को राजधानी का भ्रमण कराया जाएगा। ये सरकारी मेहमान रहेंगे। दो दिनों का टूर प्रोग्राम भी तय कर दिया गया है। संसद भवन, नेहरू प्लेनेटोरियम, नेशनल वार मेमोरियल, इंडिया गेट देखने जाएंगे। नीति आयोग के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल से चर्चा और केंद्रीय राज्य मंत्री से मुलाकात भी करेंगे।

बाल वैज्ञानिक जिनके प्रोजेक्ट की चर्चा देश के साथ ही विदेश में हो रही

अर्थक्वेक प्रिडिक्शन विथ रियल टाइम (एआइ)

बाल वैज्ञानिक अदीबा अंजुम ने इस प्रोजेक्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग किया गया है। इसमें फीचर्स इंजीनियरिंग, क्लास इंबैलेंस, टारगेट कन्वर्जन का प्रयोग किया गया है। डिसीजन ट्री क्लासीफायर, एक्स जी बूस्ट, अड्डबूस्ट की मेथाडोलाजी का प्रयोग कर प्रिडिक्शन किया जाता है। यह प्रोजेक्ट इनोवेशन चैलेंज 2.0 के इनिशियल राउंड में डिसास्टर मैनेजमेंट कैटेगिरी में टाप पर रहा है। जिस जगह पर भूकंप की आशंका बनी रहती है, वहां एआइ तकनीक से इस प्रोजेक्ट के जरिए समय से पहले जानकारी मिल जाती है।

प्रोजेक्ट प्रहार

जलकुंभी पानी और भूजल स्त्रोत दोनों को खराब करता है। जलकुंभी को पानी से निकलकर इससे मूल्यवान वस्तुएं जैसे एक्टिवेटेड चारकोल और पथरी का निर्माण कर एक अलग से आय का स्त्रोत बनाया जा सकता है। इसी सोच के साथ बाल वैज्ञानिक हर्ष श्रीवास्तव ने इस पर काम करना प्रारंभ किया। इस प्रोजेक्ट को अटल इनोवेशन मिशन के 2022-23 के मैराथन में टाप 100 में जगह मिली है। नीति आयोग ने इस प्रोजेक्ट की सराहना की है।

रिलेक्शो शू

बाल वैज्ञानिक चिन्मय देव ने फुट रिलेक्सो शू का आविष्कार किया है। यह जूता कमाल का है। इसके पहनते ही सिर दर्द गायब हो जाता है। माइग्रेन की समस्या को भी काफी हद तक दूर करने में यह जूता सफल रहा है। रिलेक्सो शू बनाने के बाद बाल विज्ञानी चिन्मय और एटीएल के प्रभारी डा. धनंजय पांडेय ने ऐसे 100 लोगों पर जिनको सिर दर्द और कमर दर्द की शिकायत रहती थी, उस पर प्रयोग किया गया। शू को पहनाकर 40 मिनट तक पैदल चलाया गया। पैदल चलने के बाद ऐसे लोगों ने राहत महसूस की है। खास बात ये नीति आयोग ने पेटेंट की कार्रवाई प्रारंभ करा दी है।

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