स्वस्थ्य छत्तीसगढ़ का आधार, आयुष्मान कार्डः विष्णु देव साय सरकार के गठन के बाद छत्तीसगढ़ में बने 15 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड

स्वस्थ्य छत्तीसगढ़ का आधार, आयुष्मान कार्डः विष्णु देव साय सरकार के गठन के बाद छत्तीसगढ़ में बने 15 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड

Ayushman Card: रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत महिलाओं के आयुष्मान कार्ड पंजीयन की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। योजना के प्रारम्भ से अब तक 1 करोड़ 20 लाख 65 हजार 107 महिलाओं का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने, महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयुष्मान भारत योजना के तहत अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, जिससे वे निःशुल्क और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। प्रदेश सरकार ने महिलाओं को राशन कार्ड में परिवार का मुखिया बनाए जाने की नीति को इस योजना से भी जोड़ा है, जिससे आयुष्मान कार्ड पंजीयन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। राज्य के 33 जिलों में राशन कार्डधारी परिवारों की महिलाओं के आयुष्मान कार्ड पंजीयन का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएँ इस योजना के अंतर्गत निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं से लाभान्वित हो रही हैं। छत्तीसगढ़ में 13 दिसंबर 2023 को विष्णु देव साय सरकार के शपथ ग्रहण से लेकर अब तक 15 लाख 31 हजार 857 महिलाओं के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यदि आँकड़ों को देखें, तो राज्य में हर महीने औसतन 1 लाख से अधिक महिलाओं के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। यह निरंतर जारी प्रयास राज्य की महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड पंजीकरण पूर्णतः निःशुल्क है। प्रदेशभर में सभी च्वाइस सेंटर, शासकीय अस्पतालों और निजी अनुबंधित अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड बनवाने की सुविधा उपलब्ध है। शासकीय कार्य दिवसों में लोग इन केंद्रों पर जाकर निःशुल्क पंजीयन करवा सकते हैं।

ऐसे बनवाएं डिजिटल आयुष्मान कार्ड

यदि कोई व्यक्ति स्वयं आयुष्मान कार्ड बनवाना चाहता है, तो यह भी ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से संभव है। गूगल प्ले स्टोर पर “आयुष्मान भारत“ एप डाउनलोड करके स्वयं कार्ड पंजीकरण किया जा सकता है।यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर आसानी से घर बैठे पंजीयन कराना चाहते हैं। इस डिजिटल सुविधा का लाभ उठाते हुए पहले ही बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपना पंजीकरण पूरा कर लिया है। आपको जन आरोग्य योजना के अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करना होगा। अब आपको कुछ पर्सनल डिटेल्स देनी होगी और सबमिट ऑप्शन को सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद आपको स्क्रीन पर अपनी और पूरे परिवार की जानकारी शो होगी। अब अप्लाई के ऑप्शन को सेलेक्ट करें, जिसके बाद न्यू पेज ओपन होगा जिसमें एप्लीकेशन फॉर्म होगा। आवेदन फॉर्म को भरने के हाद आपको डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना होगा। डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद आपको ओटीपी वैलिडेशन करना होगा। ओटीपी वैलिडेशन होने के बाद आपको फॉर्म को सबमिट करना होगा और फिर आप आयुष्मान कार्ड को डाउनलोड कर सकते हैं।

44 फीसदी से ज्यादा महिलाओं की भागीदारी

राज्य में राशन कार्डधारी कुल आबादी के अनुपात में देखा जाए तो आयुष्मान कार्ड पंजीयन में महिलाओं की भागीदारी 44þ से अधिक हो चुकी है। यह न केवल स्वास्थ्य सेवा तक महिलाओं की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह राज्य सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं की सफलता का भी प्रमाण है। आयुष्मान कार्ड पंजीयन के बाद, पंजीकृत महिलाओं को राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध हो रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच और भी सुलभ हुई है।

क्या है आयुष्मान भारत योजना?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जरुरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक कार्ड मुहैया कराया है। कार्ड का नाम आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है। आयुष्मान कार्ड के तहत 50 हजार से लेकर 10 लाख तक का निशुल्क इलाज किसी भी अस्पताल में हो सकता है। अस्पताल चाहे सरकारी हो या फिर निजी कहीं भी कार्डधारक जाकर इलाज करा सकता है। कार्ड बनाने वाले के ऊपर बस एक नियम लागू होता है वो बीपीएल कार्डधारक होना चाहिए। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत दस लाख तक का इलाज कराया जा सकता है।

दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ बीमा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा है कि आयुष्मान भारत योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा है जिसका खर्चा खुद केंद्र सरकार उठाती है। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए हेल्थ कर्मियों को हर मोहल्ले में भेजा जाता है, गांव खेड़े में कैंप लगाकर भी कार्ड बनाया जाता है। मोदी सरकार का लक्ष्य है कि सभी जरूरतमंदों का कार्ड बन जाए। इलाज के अभाव में किसी की भी मौत नहीं हो। सरकार ने अब हितग्राहियों की सुविधा के लिए मोबाइल एप के जरिए भी आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा जारी कर दी है। अगर आप भी आप अभी तक अपना आयुष्मान कार्ड नहीं बनवा पाएं हैं तो तुरंत बनवा लें।

फर्जी दावे करने वाले अस्पतालों पर सख्त एक्शन

छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत फर्जी दावों पर सख्त कार्रवाई करते हुए रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के 28 अस्पतालों का निरीक्षण किया। जांच के बाद 15 अस्पतालों का पंजीयन एक वर्ष के लिए निरस्त कर दिया गया, जबकि 4 अस्पतालों को 6 माह के लिए, 4 को 3 माह के लिए निलंबित किया गया और 5 अस्पतालों को चेतावनी पत्र जारी किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट समय-समय पर फर्जी दावों की पहचान कर ट्रिगर भेजती रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ शासन ने विस्तृत परीक्षण कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद राज्य नोडल एजेंसी ने संदिग्ध अस्पतालों की पहचान कर राज्य एवं जिला स्तरीय अधिकारियों की विशेष बैठक बुलाई। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जिलों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीमों ने प्रत्येक दिन दो अस्पतालों की गहन भौतिक जांच की।

निरीक्षण के दौरान अनियमितताओं के प्रमाण पाए जाने पर सभी 28 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। अस्पतालों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण समाधानकारक नहीं पाए गए, जिसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस कार्रवाई को जरूरी बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना का उद्देश्य प्रदेश के हर नागरिक को सुलभ और निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियमितता करने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस तरह की अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर पूरी तरह गंभीर है और जो भी अस्पताल नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। आयुष्मान योजना का लाभ केवल योग्य लाभार्थियों तक सही रूप में पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार पूरी सख्ती से निगरानी रखेगी और आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

चिरायु टीम ने अपेक्षा को दी नई जिंदगी

ग्राम झाल खम्हरिया की 8 साल की नन्ही अपेक्षा साहू की जिंदगी अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ गई, जहाँ हर पल मौत की परछाईं उसका पीछा कर रही थी। उसके मासूम बचपन पर ब्लड कैंसर के एक दुर्लभ प्रकार एक्यूट प्रोमाइलोसाइटिक ल्यूकेमिया (एपीएमएल) ने गहरा असर डाला। महीनों से चला आ रहा बुखार, शरीर पर उभरते चकत्ते और पीलापन किसी गंभीर खतरे का संकेत दे रहे थे। जब स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम को उसकी हालत का पता चला, तो बिना देरी किए उसे एम्स रायपुर ले जाया गया, जहाँ विस्तृत जांच के बाद उसकी बीमारी की पुष्टि हुई।

इलाज की शुरुआत कीमोथेरेपी से हुई, लेकिन यह जितनी जरूरी थी, उतनी ही खतरनाक भी साबित हुई। पहली ही खुराक के बाद उसके शरीर ने गंभीर प्रतिक्रिया दी, अचानक दौरे पड़ने लगे, मस्तिष्क में रक्तस्राव (सीवीए) हो गया, और उसका बायाँ हिस्सा अर्ध-पक्षाघात (हेमिप्लेगिया) से प्रभावित हो गया। यह सब देखकर उसके माता-पिता का दिल बैठ गया। उन्हें लगा कि अब कुछ भी ठीक नहीं हो सकता, और उन्होंने इलाज बीच में ही रोकने का फैसला कर लिया।

लेकिन यही वह क्षण था जब चिरायु टीम ने उम्मीद का हाथ बढ़ाया। उन्होंने माता-पिता को समझाया कि यह लड़ाई अधूरी छोड़ देना ही असली हार होगी। उनकी काउंसलिंग और हौसले के चलते अपेक्षा का इलाज दोबारा शुरू हुआ। उसे बाल्को मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ उसने 7 खुराक कीमोथेरेपी पूरी की। दर्द और तकलीफ के बावजूद, उसकी मासूम आँखों में जिंदा रहने की चमक बनी रही। धीरे-धीरे उसकी हालत सुधरने लगी, और हर गुजरते दिन के साथ वह इस जानलेवा बीमारी पर विजय पाने की ओर बढ़ती गई। ऐसे कठिन समय में आयुष्मान योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता भी कारगर साबित हुई। सितंबर 2024 में, जब उसने अपनी आखिरी कीमोथेरेपी पूरी की, तो यह सिर्फ एक इलाज का अंत नहीं था, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत थी। अब वह सिर्फ दवाइयाँ ले रही है, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रही है। अभी कु. अपेक्षा कक्षा दूसरी में अध्ययनरत् है। उसकी हँसी अब दर्द से भरी नहीं, बल्कि जज़्बे और हिम्मत की कहानी बयां करती है। अपेक्षा सिर्फ एक कैंसर सर्वाइवर नहीं, बल्कि साहस और उम्मीद की मिसाल है। उनकी माता-पिता के लिए जीने का संबल है।

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